डॉक्यूमेंट्री ने याद दिलाई कश्मीरी पंडित समुदाय की दुर्दशा

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मुंबई। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) द्वारा एक कश्मीरी पंडित के जलते हुए घर से बरामद एक डायरी पर आधारित 25 मिनट की एक डॉक्यूमेंट्री यहां बुधवार को प्रदर्शित की गई। डॉक्यूमेंट्री में कश्मीरी पंडित समुदाय की दुर्दशा दिखाई गई है।

कश्मीर घाटी में 1990 में जेहादी उन्माद का शिकार हुए एक अज्ञात व्यक्ति की डायरी पर आधारित डॉक्यूमेंट्री ‘डायरी ऑफ अ कश्मीरी पंडित’ में अभिनेत्री दीप्ति भटनागर ने भावुक किरदार निभाया है।

डॉक्यूमेंट्री का लेखन और निर्माण लेखक-डॉक्यूमेंट्री निर्माता अश्विनी भटनागर ने किया है। फिल्म पूरी तरह कश्मीर में शूट की गई है और इसमें जलाए गए घर का वातावरण बनाने से लेकर मारने के लिए तैयार आक्रोशित भीड़ से दर्दनाक मौत का इंतजार कर रहे एक आदमी की मानसिक उथल-पुथल का प्रभावशाली चित्रण किया गया है।

पत्रकार रह चुके भटनागर ने आईएएनएस से कहा, “फिल्म की कहानी बीएसएफ द्वारा 1990 में एक कश्मीरी पंडित के जले हुए घर से बरामद एक डायरी के आधार पर लिखी गई है। उन्होंने कहा, “बेहतर की उम्मीद कर रहे सबसे बदतर स्थिति में फंसे एक कश्मीरी पंडित द्वारा डायरी में लिखी उसकी सभी भावनाओं को इसमें चित्रित किया गया है।”

फिल्म की शुरुआत में श्रीनगर में हिंसा शुरू होने के कारण एक पंडित अपने परिवार को जम्मू भेज रहा है। नौकरी के कारण उसे श्रीनगर में ही रहना है और कर्फ्यू के दौरान खाली समय में वह डायरी लिखना शुरू कर देता है। फिल्म में यह बहुत ही भावुक तरह से दिखाया गया है कि हिंसा के दौरान वह किन परिस्थितियों से गुजरता है।

पिछले तीन सालों में कई शीर्ष व्यवसायियों की जीवनी सहित सात किताबें लिख चुके भटनागर ने कहा, “इसमें दिखाया गया है कि हिंसा कैसे हर इंसान को उसके आस-पास के वातावरण से दूर कर देती है और उसे डरावनी भीड़ वाली मानसिकता अपनाने को मजबूर कर देती है। कश्मीर विशेषज्ञ और पत्रकार आर.सी. गंजू इसके कार्यकारी निर्माता हैं, जबकि सुशेन भटनागर ने फिल्म का निर्देशन किया है।

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