अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देने पर डॉ. कफील गिरफ्तार, STF ने मुंबई से दबोचा

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में भड़काऊ भाषण देने वाले डॉ. कफील को स्पेशल टास्ट फोर्स (STF) ने मुंबई से दबोच लिया है। गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत के बाद चर्चा में आए डॉ. कफील पर एएमयू की सभा में छात्रों को सांप्रदायिकता के नाम पर उकसाने के साथ ही गृहमंत्री के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी के आरोप हैं।

 

अलीगढ़ निवासी डॉ. कफील ने 12 दिसंबर को एएमयू में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव के साथ सीएए के खिलाफ हो रही सभा में भाग लिया था। पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमे के अनुसार कफील ने सभा में छात्रों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास किया। यहां उन्होंने मोटा भाई शब्द का इस्तेमाल कर इशारों में गृहमंत्री के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी भी की।

इस मामले में अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाने में सभा के दौरान ड्यूटी पर तैनात एसआइ दानिश ने 13 दिसंबर 2019 को मुकदमा दर्ज कराया था। बताया गया है कि उसके बाद डॉ. कफील मुंबई भाग गया था, जिसे बुधवार देर शाम एसटीएफ ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया। डॉ. कफील इससे पहले गोरखपुर के बाबा राघवदास मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत के मामले में भी आरोपित और विवादित रहा है।

मुकदमे में दर्ज कफील के जहरीले बोल

  • सीएए से तुम्हें दोयम दर्जे का बनाया जा रहा है।
  • हम 25 करोड़ हैं। तुम हमें डरा नहीं सकते। हम तुम्हें बताएंगे कि देश कैसे चलेगा।
  • तुम्हारे अब्बा का सर्टिफिकेट ठीक नहीं है, कहकर तुम्हें दौड़ाया जाएगा। यह हमारे वजूद की लड़ाई है, हमें लड़ना पड़ेगा।
  • सीएए ऐसा है कि पड़ोस में चोरी करने वाले चोर को हम अपने घर में नौकरी दे रहे हों।

डॉ. कफील का विवादों से रहा पुराना नाता

भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुंबई में गिरफ्तार किए गए डॉ. कफील का विवादों से पुराना नाता रहा है। बीआरडी मेडिकल कालेज, गोरखपुर के बाल रोग विभाग में प्रवक्ता के पद पर तैनाती के बाद विभागाध्यक्ष से असहमति और अपने विवादित बयान की वजह से भी वह हमेशा चर्चाओं में बने रहते थे। अगस्त 2017 में मेडिकल कालेज में बच्चों की मौत के बाद उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इस मामले में डा. कफील को एसटीएफ ने दो सितंबर 2017 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पहली बार 2013 में दोस्त की जगह मेडिकल की परीक्षा देते हुए गिरफ्तार किया गया था। उस समय उन्हें तीन माह तिहाड़ जेल में बिताने पड़े थे।

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