Dr. Shyama Prasad Mukherjee की 120वीं जयंती पर PM Modi समेत दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि

जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 120वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ समेत देश के कई बड़े दिग्गजों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है

नई दिल्ली: देश आज जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (Dr. Shyama Prasad Mukherjee) की 120वीं जयंती मना रहा है। 6 जुलाई 1901 में उनका जन्म कलकत्ता (Calcutta) में हुआ। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई बड़े नेताओं ने उन्हें नमन किया है।

पीएम मोदी (PM Modi) ट्वीट कर बोले मैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी जयंती पर नमन करता हूं। उनके उदात्त आदर्श देश भर में लाखों लोगों को प्रेरित करते हैं। डॉ. मुखर्जी ने अपना जीवन भारत की एकता और प्रगति के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने खुद को एक उल्लेखनीय विद्वान और बुद्धिजीवी के रूप में भी प्रतिष्ठित किया।

इन नेताओं ने किया नमन

पश्चिम बंगाल (West Bengal) के कोलकाता में राज्य BJP अध्यक्ष दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की  है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने लखनऊ (Lucknow) में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, “देश के विकास, भारत की अखंडता के लिए, शिक्षा जगत में श्यामा प्रसाद मुखर्जी योगदान के लिए हम प्रदेशवासियों की तरफ से श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।”

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने  भोपाल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “नई राजनीतिक संस्कृति का विकास करने वाले हमारे मार्गदर्शन श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्मदिन है। उन्हीं के दिखाए मार्ग पर आज केंद्र सरकार चल रही है।”

राजनीतिक जीवन

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने स्वेच्छा से अलख जगाने के उद्देश्य से राजनीति में प्रवेश किया। वे सच्चे अर्थों में मानवता के उपासक और सिद्धान्तवादी थे। उन्होंने बहुत से गैर कांग्रेसी हिन्दुओं की मदद से कृषक प्रजा पार्टी से मिलकर प्रगतिशील गठबंधन का निर्माण किया। इस सरकार में वे वित्तमन्त्री बने। इसी समय वे सावरकर (Savarkar) के राष्ट्रवाद के प्रति आकर्षित हुए और हिन्दू महासभा में सम्मिलित हुए।

मुस्लिम लीग की राजनीति से बंगाल का वातावरण दूषित हो रहा था। वहां साम्प्रदायिक विभाजन की नौबत आ रही थी। साम्प्रदायिक लोगों को ब्रिटिश सरकार (British Government) प्रोत्साहित कर रही थी। ऐसी विषम परिस्थितियों में उन्होंने यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया कि बंगाल के हिन्दुओं की उपेक्षा न हो। अपनी विशिष्ट रणनीति से उन्होंने बंगाल (Bengal) के विभाजन के मुस्लिम लीग के प्रयासों को पूरी तरह से नाकाम कर दिया। 1942 में ब्रिटिश सरकार ने विभिन्न राजनितिक दलों के छोटे-बड़े सभी नेताओं को जेलों में डाल दिया।

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