जानकारी के आभाव में राष्ट्रीय पेंशन योजना औंधे मुंह गिरी, मात्र 2.66 फीसदी व्यापारियों का ही रजिस्ट्रेशन

हमीरपुर : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के चित्रकूटधाम मंडल में छोटे व्यापारियों के लिये संचालित राष्ट्रीय पेंशन योजना (National pension scheme) औंधे मुंह गिर गयी है। उद्योग विभाग के ढिलमुल रवैये से डेढ़ साल मे चार जिलों मे मात्र तीन फीसदी व्यापारियों का पंजीकरण हो पाया है। ज्यादातर व्यापारियों को इस योजना की जानकारी ही नहीं है।

श्रम प्रवर्तन अधिकारी अरुण कुमार तिवारी (Arun Kumar Tiwari) ने गुरूवार को बताया कि सरकार ने डेढ़ साल पहले छोटे और खुदरा व्यापारी (Retail trader) जिनका वार्षिक टर्न ओवर 1.5 करोड रुपये अथवा उससे कम है, को चिन्हित कर 18 से 40 साल तक प्रीमियम जमा करने का प्राविधान रखा है। इसके बाद संबंधित व्यापारी को साठ साल के बाद तीन हजार रुपये जीवित रहने तक निर्धारित किया है।

सरकार ने इस कार्य की जिम्मेदारी श्रम विभाग, उद्योग विभाग और नगर विकास विभाग को दी थी। शासन ने बांदा जिले को 8100 का रजिस्ट्रेशन का लक्ष्य दिया था जिसके विरुद्ध मात्र 232 व्यापारियो का रजिस्ट्रेशन किया गया है जो लक्ष्य का 2.66 फीसदी है इसी प्रकार हमीरपुर जिले के पांच हजार रुपये रजिस्ट्रेशन के विरुद्ध 155 व्यापारियों का रजिस्ट्रेशन किया गया है जो लक्ष्य का मात्र 3.1 फीसदी है, महोबा जिले ने 3900 के विरुद्ध 117 रजिस्ट्रेशन किया है जो तीन फीसदी बताया जाता है। चित्रकूट जिले ने 4500 के विरुद्ध 153 रजिस्ट्रेशन किया है जो लक्ष्य का 3.4 फीसदी है।

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तिवारी ने बताया कि 40 वर्ष के व्यापारी को अधिकतम प्रीमियम हर माह 200 रुपये जमा करना होता है क्योंकि जितना प्रीमियम लाभार्थी को देना होता है उतना ही प्रीमियम केंद्र सरकार देती है,मगर ज्यादातर व्यापारी जानकारी देने के बाद रुचि नही लेते है जिससे योजना की प्रगति बहुत ही कम है। सरकार के निर्देश है कि जगह- जगह केंद्र बनाकर नामांकन कराया जाये मगर श्रम विभाग ने तो कैम्प लगाकर रजिस्ट्रेशन किये है मगर उद्योग विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नही दिया है। न ही किसी व्यापारी को कोई जानकारी दी गयी है जिससे योजना फ्लाप होती जा रही है।

खुदरा व्यापारी रामसनेही का कहना है कि पेशन योजना है तो अच्छी, मगर इस मामले में उसे कोई जानकारी नही है। किराना व्यापारी देवकुमार ने बताया कि उद्योग विभाग व सेल टैक्स विभाग तो अक्सर जाता रहता है मगर डेढ साल हो गये है इस प्रकार की चर्चा किसी ने आज तक नही की है।

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