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मंगल ग्रह पर ग्रहण, क्या आप भी धरती से देखना चाहते है अद्भुत नजारा, जानें सही वक्त

इसमें मंगल ग्रह चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा। वैसे तो यह घटना वर्ष में दो बार होती है, इसलिए बहुत अधिक दुर्लभ तो नहीं है, लेकिन किसी स्थान विशेष के लिए यह सामान्य भी नहीं है।

नई दिल्ली: शनिवार को एक शाम 5 बजे भआरत में मंगल का दुर्लभ चंद्रग्रहण दिखाई देगा। लेकिन यह सूर्य या चंद्रमा पर नहीं बल्कि मंगल ग्रह पर लगेगा। इसमें मंगल ग्रह चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा। वैसे तो यह घटना वर्ष में दो बार होती है, इसलिए बहुत अधिक दुर्लभ तो नहीं है, लेकिन किसी स्थान विशेष के लिए यह सामान्य भी नहीं है। भारत में पिछली बार यह घटना 10 मई, 2008 को दिखाई दी थी। यह केवल भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण अफ्रीका के पश्चिमी तट से दिखाई देगा।

मंगल के करीब से गुजरेगा चांद

इस घटना के दौरान, चंद्रमा लगभग डेढ़ घंटे के लिए पूरी तरह से मंगल ग्रह को ढ़क देगा। मंगल पर चंद्रग्रहण तब होता है जब चंद्रमा मंगल के सामने से गुजरता हुआ दिखाई देता है। चंद्रमा हर महीने मंगल के बहुत करीब से गुजरता है। इस घटना को शाम को सूर्योस्त के बाद पश्चिम दिशा में इस देख सकते हैं। इस घटना का आनंद लेने के लिए जरूरी नहीं कि आपके पास एस्टोनॉमिकल टेलीस्कोप (Astronomical Teliscope) हो, कोरी आंख से भी इस घटना को देखा जा सकता है, किंतु यदि एस्टोनॉमिकल टेलीस्कोप से इसको देखा जाए तो शानदार नजारा देखने को मिलेगा, जिसमें मंगल ग्रह चंद्रमा के पीछे छिप जाएगा और कुछ समय के बाद अचानक फिर से प्रकट होगा।

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इस वक्त देखेंं ग्रहण

मंगल ग्रह चंद्रमा की ओट में 5 बजकर 48 मिनट पर छिप जाएगा और 7 बजे कर 17 मिनट से 8 बजे तक अर्द्ध चंद्रमा के दाहिनी ओर से नीचे की तरफ एक लाल-नांरगी बिन्दु के रूप में प्रकट होकर चंद्रमा से धीरे-धीरे दूर होता जाता हुआ दिखाई देगा। वैसे तो यह घटना वर्ष में दो बार होती है, इसलिए बहुत अधिक दुर्लभ तो नहीं है, लेकिन किसी स्थान विशेष के लिए यह इतनी सामान्य भी नहीं है। भारत में पिछली बार यह घटना 10 मई, 2008 को दिखाई दी थी। पिछले कुछ महीनों में ऐसी घटना हुई है, जिनमें से दो क्रमशः अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में दिखाई दी थी।

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लुनार-मार्स (Lunar Mars) ऑकल्चरेशन भी एक तरह का ग्रहण ही है। यह तब घटित होता है जब कोई एक खगोलीय पिंड या वस्तु किसी अन्य खगोलीय पिंड की आड़ में आ जाए और खगोलीय पिंड कुल समय के लिए दिखाई ना दे। ऐसी स्थिति में आधा चंद्रमा मंगल ग्रह के सामने से गुजर रहा होगा और कुछ समय के लिए पृथ्वी से मंगल ग्रह दिखाई देना बंद हो जाएगा।

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