कुशीनगर में 37 करोड़ के लागत की आठ विकास परियोजनाओं को मंजूरी

प्रदेश सरकार ने भगवान गौतमबुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में 37 करोड़ के लागत की आठ विकास परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है।

कुशीनगर: उत्तर प्रदेश सरकार ने भगवान गौतमबुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर में 37 करोड़ के लागत की आठ विकास परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में भगवान बुद्ध से जुड़ी नदी कुकुत्था (घाघी)  नदी के किनारे ‘रिवर फ्रंट’ बनेगा।

पर्यटकों की संख्या में तेजी

भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर को संवारने की कवायद तेज हो रही है। अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट चालू होने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि की संभावना है। इसको देखते हुए सरकार ने कुशीनगर में पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में बौद्ध सर्किट में सारनाथ व कुशीनगर में 26 परियोजनाओं के विकास को लेकर 167 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है।

26 बड़ी परियोजना

पर्यटन विभाग के अनुसार इन 26 बड़ी परियोजनाओं में आठ परियोजनाएं कुशीनगर की हैं, शेष सारनाथ की हैं। कुशीनगर की परियोजनाओं में कुकुत्था रिवर फ्रंट है, जो चार करोड़ रुपये से विकसित की जाएगी। इसमें नदी के किनारे पक्का घाट, एप्रोच, पाथवे, भगवान बुद्ध की विभिन्न मुद्रा में बैठी प्रतिमाएं, पार्किंग स्थल, बैठने का पक्का स्थान, पेयजल के लिए आरओ प्लांट आदि की व्यवस्था होगी। इसके अलावा कुशीनगर में दो करोड़ की लागत से फूड प्लाजा, शौचालय उच्चीकरण व पार्किंग का निर्माण होगा। छह करोड़ की लागत से विपश्यना (ध्यान) केंद्र का विकास होगा। वन विभाग के पार्क को इसके लिए विकसित किया जाएगा। इसके उच्चीकरण, सृदृढ़ीकरण, मेडिटेशन प्वाइंट, चारदीवारी, पाथवे, प्रवेश द्वार, दो तालाब, वाटर एटीएम आदि का निर्माण कराया जाएगा।

राजकीय बौद्ध संग्रहालय का उच्चीकरण

राजकीय बौद्ध संग्रहालय का उच्चीकरण व सुदृढ़ीकरण कार्य भी कराए जाएंगे। इसके लिए 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कुशीनगर के होटल पथिक निवास उच्चीकरण होगा। होटल के 28 कमरों का उच्चीकरण, लॉबी से जाने वाली छत की मरम्मत, प्रबंधक व स्टाफ क्वार्टर आदि की मरम्मत होगी। कुशीनगर आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को रात्रि विश्राम के लिए बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।

बजट की जानकरी

क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी गोरखपुर रविंद्र कुमार का कहना है कि इस बजट से होने वाले सभी कार्यों के लिए डीपीआर बनाने की जिम्मेदारी गोरखपुर विकास प्राधिकरण को मिली है। प्रस्तावित कार्ययोजना के मंडलायुक्त के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उनकी अनुमति के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।

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