एम्ब्रियोस्कोप बताएगा भ्रूण अच्छा है या खराब

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आगरा। टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए महिला के गर्भ में कौन सा भ्रूण डाला जाए, इसमें अब एम्ब्रियोस्कोप मदद करेगा। अच्छे और खराब की भ्रूण की जानकारी मिलने से न सिर्फ आईवीएफ में सफलता का प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि वंशानुगत व गर्भपात की सम्भावनाए काफी हद तक कम हो जाएंगी।

यह जानकारी रेनबो हॉस्पीटल में आईवीएफ सेंटर की निदेशक डॉ. जयदीप मल्होत्रा व डॉ. केशव मल्होत्रा ने दी। हॉस्पीटल के डॉक्टर व टेक्नीशियनों के लिए वर्कशॉप आयोजित कर उन्हें एम्ब्रियोस्कोप की जानकारी दी गई। डॉ. केशव ने बताया कि आईवीएफ में भ्रूण को पांच तक इन्क्यूवेटर में रखा जाता है। इस दौरान वह किस तरह बढ़ रहा है, उसकी गति कैसी है आदि बातें भ्रूण की क्वालिटी दर्शाती हैं। पहले इसके लिए इन्क्यूबेटर से भ्रूण को निकालकर देखना पड़ता था। लेकिन अब एम्ब्रियोस्कोप के जरिए हम इसमें लगे कैमरों की मदद से बाहर स्क्रीन पर 24 घंटे भ्रूण में हो रहे विकास और बदलाव पर नजर रख सकते हैं। अभी तक आईवीएफ में सफलता का प्रतिशत 30-40 तक ही होता था। लेकिन एम्ब्रियोस्कोप से यह 60 तक पहुंच गया है। यानि इससे 20 प्रतिशत तक गर्भधारण का प्रतिशत बढ़ जाता है।

एम्ब्रियोस्कोप में लगे कैमरे हर 10 सैकेन्ड में भ्रूण की फोटो लेते हैं। यह तकनीक ऐसे लोगों के लिए ज्यादा फायदेमंद हैं, जिनमें आईवीएफ कराने पर भी गर्भ ठहर नहीं रहा है। डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा गर्भपात का कारण 25 प्रतिशत में सामान्य व 75 प्रतिशत जैनेटिक होता है। यदि हम एम्ब्रियोस्कोप से जांच परख कर भ्रूण का चुनाव करें तो जैनेटिक डिसआर्डर के कारण होने वाले गर्भपात को 50 फीसदी तक कम किया जा सकता है। इस मौके पर डॉ. निहारिका व डॉ. दीक्षा भी मौजूद थीं।

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