आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हार्डवेयर, मैन्युफैक्चरिंग, सॉफ्टवेयर क्षेत्र में मिलेगा रोजगार

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भारतीय इंजीनियर अब बेरोजगार नहीं रहेंगे। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शिक्षा में शामिल करने को मंजूरी दे दी है। सीआईआईटी, फिक्की, एसोचैम, नैसकॉम, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने सरकार को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स पर पढ़ाई की सिफारिश दी थी। इसी के तहत अब अंतरिम बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संस्थान मंजूर हुआ है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने विशेष बातचीत में कहा कि अब इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद युवा बेरोजगार नहीं रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पासआउट छात्रों की बेहद मांग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के चलते छात्र इनोवेशन व रिसर्च में आगे बढ़ेंगे। बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संस्थान को मंजूरी मिली है। यह संस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस का दर्जा पाने वाले संस्थानों समेत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पढ़ाई करवाने वाले संस्थानों के साथ मिलकर काम करेगा।

आईआईटी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बीटेक व एमटेक प्रोग्राम में पढ़ाई का मौका उपलब्ध करवा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हार्डवेयर, मैन्युफैक्चरिंग, बीएफएसआई, सॉफ्टवेयर आदि की मांग है।

जावडेकर के मुताबिक, सीआईआई-एआईसीटीई की इंडिया स्किल रिपोर्ट 2019 में पंद्रह फीसदी रोजगार के मौके बढ़ने का खुलासा किया गया था। इसके अलावा सीआईआई, फिक्की, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, एसोचैम, नैसकॉम ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों को इंजीनियरिंग में प्रमुखता से शामिल करने की सिफारिश दी थी। दरअसल ऐसे ही विषयों में पासआउट युवाओं को नौकरी की अपार संभावनाएं होंगी।

मोदी सरकार का मकसद है कि युवाओं को स्किल आधारित डिग्री पढ़ाई करवाई जाए, जिससे कि कॉलेज से निकलते ही नौकरी के अवसर उपलब्ध हो सकें। गौरतलब है कि आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी दिल्ली समेत कुछ अन्य आईआईटी 2019 सत्र से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विषय को बीटेक डिग्री प्रोग्राम में जोड़ने जा रहे हैं।

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