इंजीनियर हत्यांकांड: क्या बिहार में जंगलराज की वापसी हुई?

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नई दिल्ली। शनिवार को बिहार में खुलेआम हुई दो इंजीनियरों की हत्‍याओं से पूरा बिहार सहम गया। ऐसा लगता है कि 12 साल बाद फिर से रंगदारी की बीमारी लौट आई है। वारदात के बाद से बिहार के सीएम नीतीश कुमार के सुशान पर सवाल खड़े हो गए हैं। दो इंजीनियरों की हत्या ने 12 साल पहले इंजीनियर सत्येंद्र दुबे हत्यकांड की याद ताजा कर दी।

जंगलराज रिटर्न्स!

सड़क निर्माण में लगे दोनों इंजीनियरों ब्रजेश सिंह और मुकेश कुमार की कल दरभंगा जिले में 2 मोटरसाइकिल सवार 4 बदमाशों ने दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। वारदात को अंजाम देने वाले बदमाशों का दुस्साहस तो देखिए। उन्होंने हत्या के बाद वहां एक पर्चा छोड़ा। पर्चे पर लिखा था, “जहां जाओगे वहीं पाओगे, मुझसे बचकर बिहार में कहां जाओगे.”

रंगदारी से जुड़ा है मामला

हत्‍या का यह मामला रंगदारी से जुड़ा हुआ है। सड़क निर्माण करने वाली प्राइवेट कंपनी c एंड c के प्रोजेक्ट इंजीनियर मुकेश कुमार सिंह और काम की मॉनिटरिंग कर रही रोडिक कंसल्टेंट कंपनी के फिल्ड इंजीनियर ब्रजेश कुमार सिंह। बिहार के दरभंगा में राजमार्ग 88 के कंस्ट्क्शन के काम में लगे थे। पिछले कई दिनों से सीएंडसी कंपनी से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी जा रही थी। रंगदारी की मांग के बाद सुरक्षा के लिए 5 पुलिसवाले तैनात भी किए गए थे, लेकिन वारदात से ठीक पहले थाना प्रभारी ने विशेष कारण बताकर पुलिस सुरक्षा हटा ली।

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सत्येंद्र दुबे की हत्या याद दिला गई!

रंगदारी की वारदात ने बिहार को 12 साल साल पीछे लाकर खड़ा किया है। 2003 में स्वर्णिम चुतर्भुज सड़क के निर्माण में लगे इंजीनियर की रगंदारी नहीं देने पर हत्या कर दी गई. कल दरभंगा में इंजीनियरों की हत्या को विपक्षी दल जंगलराज की वापसी बता रहे हैं।

संतोष झा पर लगा हत्‍या का आरोप

दोनों इंजीनियरों की हत्या के पीछे कुख्यात अपराधी संतोष झा का हाथ बताया जा रहा है। राज्य सरकार ने हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए तेज तर्रार एसपी शिवदीप लांडे को जांच का जिम्मा सौप दिया है। राज्य सरकार दावा कर रही है। हत्या में शामिल एक भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर पटना में बीजेपी और एलजेपी ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।

विपक्षियों का नीतीश पर हमला

दरभंगा हत्याकांड ने विपक्षी दलों को नीतीश सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया। विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि नीतीश सरकार के शपथ ग्रहण के डेढ़ महीने के भीतर ही राज्य में कानून-व्यवस्था अपराधियों के लाचार हो गई है।

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