न्यूजीलैंडः 65 फीसदी लोगों ने इच्छामृत्यु के पक्ष में किया मतदान, इच्छामृत्यु बना कानूनी अधिकार

इच्छामृत्यु आज भी कई देशों में बहस का विषय है। इसी कड़ी में न्यूजीलैंड में इच्छामृत्यु को लेकर लोगों में जमनत संग्रह कराया गया था।

नई दिल्लीः इच्छामृत्यु आज भी कई देशों में बहस का विषय है। इसी कड़ी में न्यूजीलैंड में इच्छामृत्यु को लेकर लोगों में जमनत संग्रह कराया गया था।

दरअसल न्यूजीलैंड की सरकार ने इच्छामृत्यु के मसले पर देश में जनमत संग्रह कराया, जिसमें 65 प्रतिशत से ज्यादा लोगों ने इच्छामृत्यु के पक्ष में मतदान किया है। मतदान के इन नतीजों के बाद न्यूजालैंड बहुत जल्द उन देशों की फेहरिस्त में शामिल हो जाएगा, जहां डॉक्टर की मदद से इच्छामृत्यु को कानूनी रूप से मान्यता मिल जाएगी।

इच्छामृत्यु के अधिकार के लिए न्यूजीलैंड के कानून में बदलाव का अभियान चला रहे डेविड सेमूर ने मतदान के नतीजों को अभूतपूर्व करार दिया है। डेविड के अनुसार, ‘न्यूजीलैंड के हजारों देशवासियों के पास अब इच्छा, गरिमा, नियंत्रण और अपने शरीर के बारे में फैसला करने की आजादी होगी, जिसकी रक्षा खुद न्यूजीलैंड का कानून करेगा।’

गौरतलब है कि न्यूजीलैंड में इच्छामृत्यु पर 2015 में लेक्रेटिया सील्स नामक महिला द्वारा बहस शुरू की गयी थी। हालांकि कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु की मांग खारिज करने के दिन ही सील्स की ब्रेन ट्यूमर के कारण मौत हो गयी थी। तब से इच्छामृत्यु का मसला न्यूजीलैंड में प्रमुख मुद्दा था।

वहीं अगर दुनिया के अलग-अलग देशों की बात करें तो इच्छामृत्यु का अधिकार सबसे पहले 2002 में नीदरलैंड्स में दिया गया था। जिसके बाद बेल्जियम में और 2008 में लग्जमबर्ग, 2015 में कोलंबिया और 2016 में कनाडा ने भी इसे कानूनी मान्यता प्रदान कर दी गई। अमेरिका के भी कई राज्यों व ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में भी इच्छामृत्यु को वैध करार दे दिया गया है।

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