पुलवामा हमले में बचे सैनिकों द्वारा बदला न ले पाने का आज भी मलाल

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जम्मू कश्मीर:आज ही के दिन पिछले वर्ष पुलवामा में हमारे देश के 40 जवान शहीद हुए थे। दक्षिणी कश्मीर में पुलवामा जिले के लेथपोरा इलाके में एक सीआरपीएफ काफिले पर आत्मघाती हमले के जख्म अभी तक भरे नहीं हैं। इस आत्मघाती हमले में 44 जवान शहीद हो गए थे। उनके जो साथी बचे है उनके जेहन में एक साल पुराना वाकया और दिल को दहला देने वाला वो मंजर आज भी बिल्कुल ताजा है।

इस भीषण हमले में जो सीआरपीएफ के जवान जिन्दा बचे है उनके लिए यह हमला एक साल पहले का नहीं, कल ही की बात लगती है। पुलवामा हमले में बचे हुए जवानों का सिर्फ एक ही मलाल है कि वो पुलवामा हमले का बदला अपने हाथों से नहीं ले पाए। सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन के पांच जवान जीवित बचने वालों में शामिल थे।

इसी के साथ 45वीं बटालियन के हैड कांस्टेबल राजेश प्रताप सिंह ने कहा कि हमले के बाद का वो मंजर कल की घटना लगता है। राजेश ने कहा ‘धमाके के वक्त हमारी गाड़ी हमले का शिकार वाहन से दो गाड़ी के अंतर पर थी।
धमाके के बाद हवा में आग के अंगारे नजर आए। चारों तरफ साथी जवानों के चीथड़े बिखरे हुए थे। उनके दिल में मुंह तोड़ जवाब देने का जज्बा है, जिसे वह आतंक रोधी अभियान में अपना रहे हैं।’ एक अन्य जवान हैड कांस्टेबल सुनील कुमार ने बताया कि वो दृश्य कभी नहीं भूल पाता।

सुनील के अनुसार शहीद साथियों की यादें साथ लेकर आतंक के खिलाफ लगातार आगे बढ़ रहे हैं। साथियों को खोने का गम भी था। हादसे की रात किसी ने खाना नहीं खाया। लेकिन जवानों के मनोबल में कोई कमी नहीं आई है।

सीआरपीएफ का यह काफिला उस दिन सुबह साढ़े तीन बजे जम्मू से चला था। दोपहर 3 बजे के आस पास पुलवामा के लेथपोरा में आत्मघाती हमला हो गया। काफिले में शामिल जवान अपनी छुट्टियां काट कर ड्यूटी के लिए श्रीनगर जा रहे थे। काफिले में कुल 78 गाड़ियां थीं।

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