रेलवे में हर साल जितनी भर्तियों नहीं, कहीं उससे ज़्यादा कर्मचारी हो रहे रिटायर

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नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी सरकार देश के सवर्ण समुदायों के गरीब सदस्यों के लिए सरकारी नौकरियों में कोटा अलग से रखने के लिए संसद में विधेयक लाई. 2019 आम चुनाव से पहले मोदी सरकार ने ये कदम उठाया. बता दें कि बीते महीने ही मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के विधानसभा चुनाव नतीजों में बीजेपी को कांग्रेस के हाथों मात खानी पड़ी.

आर्थिक तौर पर सवर्णों के लिए आरक्षण को लेकर मोदी सरकार के फैसले की टाइमिंग पर और सरकार की मंशा को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है. क्या सरकार वाकई गरीबों को नौकरियां देने के लिए गंभीर है? क्या सरकार ने मौजूदा सरकारी रिक्तियों को भरने के लिए वाकई पर्याप्त काम किया?

इन सवालों का जवाब जानने के लिए इंडिया टुडे ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भारतीय रेलवे को याचिका भेजी. 14 लाख कर्मचारियों वाला रेलवे भारत का सबसे बड़ा नियोक्ता है. विश्व में रेलवे का सबसे बड़े नियोक्ताओं में आठवां नंबर है.

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