कॅरियर की फ‍िक्र में रोज खुदकुशी कर रहे हैं तीन नौजवान

suicide_2439218fनई दिल्ली। पढ़ाई, कॅरियर और अपेक्षाओं का बोझ युवाओं पर भारी पड़ रहा है। हालात इतने खराब हैं कि 2014 में कॅरियर संबंधी परेशानियों के कारण रोज करीब तीन लोगों ने आत्‍महत्‍या कर ली है। खुद सरकार ने यह बात स्‍वीकारी है। बुधवार को गृह राज्यमंत्री हरिभाई पारथीभाई चौधरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में राज्यसभा को बताया कि देश में आत्महत्या के कारणों से संबंधित ब्योरा बताता है कि वर्ष 2014 में व्यवसाय और करियर संबंधी समस्याओं के चलते 903 लोगों ने आत्महत्या की।

माता-पिता की उम्‍मीदों के बोझ तले दबकर एक और बेटे ने दे दी जान

उन्होंने बताया कि अवैध संबंधों के महज संदेह के चलते वर्ष 2014 में 458 लोगों ने अपनी जान दे दी, जबकि सामाजिक बदनामी के चलते इस तरह की 490 मौते हुईं। ब्योरे के अनुसार अपने नायकों की अंधभक्ति के चलते 2014 में 56 लोगों ने खुदकुशी की। इसमें कहा गया कि प्रेम संबंध आत्महत्या के सबसे बडे़ कारणों में से एक हैं जिसके चलते 2014 में 4,168 लोगों ने अपनी जान दे दी।

प्रियजनों की मौत के चलते वर्ष 2014 में 981 लोगों ने आत्महत्या की, जबकि दीर्घकालिक और असाध्य रोगों की वजह से बड़ी संख्या में 23,746 लोगों ने अपनी जान दे दी। विवाह संबंधी समस्याओं के चलते 6,773 लोगों ने खुदकुशी की तथा नपुंसकता के चलते 332 और परीक्षा में विफलता के चलते 2403 लोगों ने आत्महत्या की।

गरीबी की वजह से 1,699 लोगों ने अपनी जान दे दी तथा बेरोजगारी की वजह से 2207 तथा सपंत्ति विवाद के चलते 1609 लोगों ने आत्महत्या की। चौधरी ने कहा, ‘राष्ट्रीय अपराध रेकॉर्ड ब्यूरो केवल भारत में होने वाली आत्महत्याओं का ब्योरा एकत्र करता है, न कि अन्य देशों का। इसलिए भारत और विदेशी देशों में होने वाली आत्महत्याओं की तुलना करना संभव नहीं है।

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