रोजाना करें ये काम, दूर होंगी सारी समस्याएं, मिलेगी सुख-समृद्धि

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हमारे मन में अक्सर कई तरह की बातें चलती रहती हैं, हमारा मन अशांत रहता है। हम बस यही सोचते है की कैसे इस उलझन को कम करे, जिससे सुख-समृद्धि मिल सके, बस उस समय हमें भगवान का ध्यान आता है। हमारे मन में यह संतुष्टि रहती है की कोई नहीं तो भगवान है और हम पुरे मन से उनका ध्यान करते है।

किसी भी चीज़ में मन को एकाग्रित करने को ध्यान कहते हैं, पूजा के बाद अगर किसी भी तरह से भगवान की उपलब्धि हो सकती है तो वो ध्यान है। ध्यान के लिए सिर्फ आंखें बंद करना ही काफी नहीं है संतुलित होना भी आवश्यक है, जो कई चरणों के बाड़ हो सकता है ध्यान की सिद्धि के बाद व्यक्ति अनंत सत्ता का अनुभव कर पाता है, और इसे समाधि कहा जाता है।

कई प्रसिद्ध गुरुओं और आचार्यों ने ध्यान के अलग अलग तरीके बताये हैं लेकिन सभी का उद्देश्य बस भगवान में आस्था की है। तो आयिए अब हम आपको अलग अलग गुरुओं की ध्यान की विधियां बताते हैं-

ओशो
– दुनिया में सबसे सरल और प्रचलित ध्यान की विधि ओशो ने बताई है।
– इसे उन्होंने “सक्रिय ध्यान” कहा है, जो पांच चरणों में होता है।
– इस ध्यान को समूह में या अकेले करना होता है, परन्तु यह समूह में ज्यादा प्रभावशाली होता है।
– ओशो ने ध्यान की अन्य विधियों के बारे में भी बताया है।
– आरम्भ से लेकर आगे बढ़ने तक कई सीढ़ियां बताई गयी हैं।
– ओशो के ध्यान में रंग, सुगंध और नृत्य-संगीत पर भी विशेष जोर दिया गया है।
– इनके ध्यान और साधना में चक्रों को कमल पुष्प के सामान बताया गया है।

बुद्ध
– वर्तमान में जिस व्यक्ति ने ईश्वर को ध्यान से पाने का मार्ग बताया, वह व्यक्ति बुद्ध ही थे।
– बुद्ध ने अष्टांग योग के माध्यम से ध्यान का मार्ग बताया।
– बुद्ध ने आचरण, व्यवहार और जीवन दर्शन के माध्यम से ईश्वर की उपलब्धि के लिए कार्य          किया।
– बुद्ध के ध्यान पद्धति में चक्र, चक्के की तरह होते हैं।
– बुद्ध की ध्यान पद्धति अब बहुत सारी पद्धतियों में घुल मिल गयी है।
– पर मूल रूप से यह अभी लामाओं की परंपरा में जीवित है।

योगानंद
– परमहंस योगानंद ने ध्यान की जिस विधि का दुनिया भर में प्रचार प्रसार किया, वह है – क्रिया    योग।
– मूल रूप से क्रिया योग पद्धति का आविष्कार एक महान गुरु “बाबा जी महाराज” ने किया था।
– इस पद्धति में भी कई चरणों के बाद ही ध्यान तक पंहुचने का अवसर मिलता है।
– क्रिया योग पद्धति, तमाम ध्यान पद्धतियों का अनूठा संयोग है।

आनंदमूर्ति
– आनंदमूर्ति जी ने बहुत सारी ध्यान पद्धतियों का सृजन और विकास किया।
– शिव, कृष्ण और बुद्ध की ध्यान पद्धतियों को दोबारा जीवित करने और उनका समन्वय करने का    श्रेय आनंदमूर्ति जी को जाता है।
– इन्होने सहज योग, विशेष योग और मधुर साधना जैसी तमाम ध्यान पद्धतियां दी हैं।
– यहाँ पर भी चक्र कमल के पुष्प की तरह ही हैं।
– यम – नियम के साथ इनकी साधना और ध्यान की पद्धतियां व्यक्ति को भौतिक और                आध्यात्मिक उपलब्धि, दोनों दे सकती हैं।

ध्यान करने में क्या-क्या सावधानियां रखनी चाहिए?

– बिना किसी आधार और उद्देश्य के लिए ध्यान न करें।
– जिस व्यक्ति से आपको ध्यान सीखना है, पहले उसकी उपलब्धियां जान लें।
– ध्यान सीखने के पूर्व, उस व्यक्ति का जीवन और सामाजिक दर्शन जानने का प्रयास करें।
– केवल आकर्षण के लिए ध्यान की ओर न जाएं।
– एक रास्ते पर ही चलें, बार बार तरीकों में बदलाव न करें।
– याद रखिये, केवल आँख बंद करना ध्यान नहीं होता, और ध्यान होता नहीं, घट जाता है।  

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