फैक्टरी में आगः पहले ही दिन आये नौकरी पर और लापता हो गए कई नाबालिग बच्चे

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नई दिल्ली: मोदीनगर की फैक्टरी में कुछ ऐसा हुआ की आठ लोग मौत की नींद सो गए. बता दे की कुछ नाबालिग बच्चे भी हैं जो रविवार को पहले दिन फैक्टरी में नौकरी पर आए और आग की लपटों के बीच में गुम हो गए। सूचना पाकर घटनास्थल पर पहुंचे उनके परिजन अब अपने बच्चों को तलाश रहे हैं। 16 वर्षीय ईशु की मां उमा देवी भगवान से अपनी इकलौती बिटिया की सलामती की दुआ मांग रही है तो वहीं, पिंटू अपने बेटे अक्षित उर्फ अक्षु को तलाश रहे हैं।बखरवा के पास स्थित कॉलोनी विजयनगर की निवासी उमा देवी का कहना है कि उनकी बेटी ईशु (16) रविवार को पहली बार फैक्टरी में काम करने आई थी। रिश्ते में उसकी भांजी लगने वाली पारुल ईशु को अपने साथ लेकर फैक्टरी आई थी। बताया गया है कि रविवार को पारुल का भी नौकरी का पहला दिन था। हर महीने 5 हजार तनख्वाह मिलने के लालच में परिजनों ने उन्हें इस मौत की फैक्टरी में काम करने भेजा। पारुल का भी घटना के बाद कुछ पता नहीं लग सका है।

विजयनगर निवासी पिंटू का भी कुछ ऐसा ही कहना है। उसका भी नाबालिग बेटा अक्षु (16) रविवार को पहली बार फैक्टरी में काम करने आया था। हादसे के बाद तीनों बच्चों के परिजन कभी उन्हें मलबे के ढेर में तलाशते रहे तो कभी हजारों ग्रामीणों की भीड़ में उन्हें तलाश की रही। इस दौरान ईशु की मां उमा कई बार अपनी सुध-बुध खो बैठी। जब एक महिला ने उसे ढांढस बंधाते हुए बताया कि उसकी बेटी जिंदा है, तब उसकी जान में जान आई। उमा देवी का कहना है कि उसके पति की मौत हो चुकी है। घर चलाने के लिए उसका बेटा अनिल और बेटी ईशु काम धंधा करने को मजबूर हैं।

जब मां ही नहीं रही तो पैसे का क्या करूं…….
अग्निकांड में जान गंवाने वाली महिला बेबी की बेटी नेहा मां की मौत से बार-बार बेसुध हो रही थी। उसका कहना था कि जब उसकी मां ही नहीं बची तो वह मुआवजे के पैसे का क्या करेगी। नेहा का भाई और परिवार की महिलाएं उसे ढांढस बंधा रही थीं, लेकिन वह एंबुलेंस में रखे अपने मां के शव को देखकर बार-बार एंबुलेंस से आगे से हटने को तैयार नहीं थी।

एनडीआरएफ से भी लगाई बच्चों की बरामदगी की गुहार…….
गौर करने वाली बात यह है कि लापता बच्चे न तो मृतकों की सूची में शामिल है और न घायलों की। रोते-बिलखते परिजन अधिकारियों से अपने कलेजे के टुकड़ों के बारे में जानकारी करते फिर रहे हैं। जिस पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें तलाशने का आश्वासन दिया। घटनास्थल से भीड़ छंटने के बावजूद लापता बच्चों के परिजन गांव भर में तलाशते फिर रहे हैं। साथ ही उन्होंने रेस्क्यू करने पहुंची एनडीआरएफ की टीम से भी अपने बच्चों को तलाशने की गुहार लगाई।

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