शुभ मुहूर्त में कड़ी सुरक्षा के बीच अयोध्या की प्रसिद्ध चौदह कोसी परिक्रमा शुरु

कड़ी सुरक्षा के बीच अयोध्या की प्रसिद्ध चौदह कोसी परिक्रमा शुरु, खुफिया विभाग और डाग स्कवायड की टीम मौजूद

अयोध्या: कड़ी सुरक्षा के बीच मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या की प्रसिद्ध चौदह कोसी परिक्रमा आज भोर में शुरु हो गई लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते परिक्रमार्थियों की संख्या काफी कम रही।

चौदह कोसी परिक्रमा

अक्षय नवमी तिथि के साथ भोर में दो बजकर तेरह मिनट पर शुभ मुहूर्त में अयोध्या की प्रसिद्ध चौदह कोसी परिक्रमा शुरू हुई। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए परिक्रमा में श्रद्धालुओं की भीड़ बहुत कम देखी गयी। जिला प्रशासन ने अयोध्या में बाहरी श्रद्धालुओं के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। परिक्रमा के मद्देनजर नदी से लेकर सडक़ मार्ग तक पुलिस का जबर्दस्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

मेला सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए हजारों की संख्या में मेलार्थियों ने परिक्रमा की है। उन्होंने बताया कि इस बार दस लाख श्रद्धालु ही परिक्रमा कर पाये होंगे क्योंकि सिर्फ स्थानीय श्रद्धालुओं ने परिक्रमा में हिस्सा लिया है और बाहरी श्रद्धालुओं पर पूरी तरह से रोक लगा दी गयी थी। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए परिक्रमा की। पौराणिक चौदह कोसी परिक्रमा को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त किये गये हैं।

खुफिया विभाग और डाग स्कवायड की टीम

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार परिक्रमा के मद्देनजर पुलिस सुरक्षा के कड़े प्रबंध किये गये। सम्पूर्ण परिक्रमा क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस व पीएसी के जवान की तैनाती थी,साथ ही प्रमुख मठ-मंदिरों में भी सुरक्षा बल के जवान तैनात रहे। उन्होंने बताया कि मेला क्षेत्र में खुफिया विभाग और डाग स्कवायड की भी टीमें लगायी गयी थीं, ताकि किसी भी अनहोनी से तत्काल निपटा जा सके। वहीं मेला कंट्रोल रूम में सम्पूर्ण मेला पर निगरानी जिलाधिकारी अनुज कुमार झा, पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार, पुलिस अधीक्षक (नगर) विजय पाल सिंह, अपर जिलाधिकारी नगर सहित तमाम अधिकारियों ने मेला कंट्रोल रूम में बैठ करके निगरानी बनाये रखी थी। यह परिक्रमा मंगलवार आठ बजकर तीन मिनट पर समाप्त होगी।

परिक्रमा का निर्धारित मार्ग

मान्यताओं के मुताबिक बड़ा परिक्रमा अर्थात् चौदह कोसी परिक्रमा का सीधा संबंध मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास से है। किवदंतियों के अनुसार भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास से अपने को जोड़ते हुए अयोध्या वासियों ने प्रत्येक वर्ष के लिये एक कोस परिक्रमा की होगी। इस प्रकार चौदह वर्ष के लिये चौदह कोस परिक्रमा पूरा किया होगा। तभी से यह परम्परा बन गयी और उस परम्परा का निर्वाह करते हुए आज भी कार्तिक की अमावस्या अर्थात् दीपावली के नौवें दिन लाखों श्रद्धालु यहां आकर करीब बयालिस किलोमीटर अर्थात् चौदह कोस की परिक्रमा एक निर्धारित मार्ग पर अयोध्या और फैजाबाद नगर तक चौतरफा पैदल नंगे पांव चलकर अपनी-अपनी परिक्रमा पूरी करते हैं।

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