किसान डालचन्द्र की आत्महत्या को भाजपा ने मुद्दा बनाया

लखनऊ। महोबा में किसान की आत्महत्या के मामले को लेकर भाजपा का रुख और आक्रामक हो गया है। पार्टी ने कहा है कि जब तक प्रदेश का किसान कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या करता रहेगा तब तक प्रदेश सरकार का किसान वर्ष मनाना बेमानी होगा।

गौरतलब है कि सूखे की मार झेल रहे किसान डालचंद्र ने बैंक और साहूकार के कर्ज से परेशान होकर ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी।

थाना महोबकंठ के ग्राम घुटई निवासी डालचंद्र (45) पुत्र चतुरभुज पिछले दो साल से अतिवृष्टि व सूखा के कारण खेतों में फसल न होने से एसबीआई बैंक कुलपहाड़ का चार लाख रुपये और साहूकारों का दो लाख रुपये कर्ज नहीं चुका पा रहा था। परिवार का भरण पोषण न कर पाने और कर्ज की अदायगी न किए जाने से वह खासा परेशान था।  सोमवार सुबह डालचंद ने दिदौरा घुटई ट्रैक से गुजर रही ट्रेन के आगे कूदकर कर आत्महत्या कर ली। किसान के पास दस एकड़ जमीन है, लेकिन सूखे के चलते बुआई नहीं हो सकी थी। उसका एक पुत्र भानुप्रताप (12) और दो पुत्री कुसुम (20) व ममता (18) हैं।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि डालचन्द्र की आत्महत्या प्रदेश के किसानों के दर्द को बंया करती है। आये दिन समाचार माध्यमों से इस तरह की घटनाएं प्रकाश में आती रहती हैं। जो गन्ने का बकाया भुगतान न होने, धान खरीद केन्द्रों के निष्क्रिय होने, अतिवृष्टि-ओलावृष्टि तथा सूखे से लगातार दूसरी बार फसल के तबाह होने, फसलों की तबाही का मुआवजा भुगतान न होने, बीज व खाद के न मिलने तथा सिंचाई के लिए बिजली न मिल पाने के कारण परेशान है।

 

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