पांच नवंबर को कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का चक्का जाम

नई दिल्ली: अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) ने हाल ही में बने कृषि कानूनों के खिलाफ पांच नवंबर को देश व्यापी चक्का जाम करने का ऐलान किया है। AIKSCC से जुड़े और इसे समर्थन दे रहे करीब चार सौ किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने आज यहां बैठक की। बैठक में फैसला लिया गया कि पांच नवंबर को चक्का जाम कार्यक्रम के बाद 26 और 27 नवंबर को ‘दिल्ली चलो, डेरा डालो, घेरा डालो’ आंदोलन के जरिए केन्द्र सरकार पर किसान कानूनों को वापस लेने का दबाव डाला जाएगा।

कृषि बिल के खिलाफ प्रदर्शन

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव और एआईकेएससीसी के संयोजक वी. एम. सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केन्द्र सरकार जब तक कृषि कानूनों को वापस नही लेगी तब तक किसानों का आंदोलन जारी रहेगा। इसे वापस ले। योगेन्द्र यादव ने कहा कि पांच नवंबर को कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों का चक्का जाम किया जाएगा। उन्होंने बिजली विधेयक के जरिए केन्द्र सरकार, राज्य सरकारों की ओर से बिजली पर दी जा रही सब्सिडी को नियंत्रित करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि सरकार बहुराष्ट्रीय कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने चाहत है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के प्रस्तावित बिजली विधेयक का मसौदा भी जनता के हितों के खिलाफ है लिहाज़ा सरकार कृषि कानून लेकर आई और अब बिजली विधेयक का मसौदा इसी मंशा से तैयार किया गया है।

योगेन्द्र यादव ने कहा कि किसान संगठनों ने पंजाब में मालवाहक ट्रेनों के परिचालन का कभी विरोध नहीं किया लेकिन सरकार मालवाहक ट्रेनों का परिचालन बंद कर और आपूर्ती को बाधित करके किसान संगठनों को बदनाम करना चाहती है। महाराष्ट्र से पूर्व सांसद और किसान नेता राजू शेट्टी ने कहा कि पांच नवंबर को देशभर के सरकारी कार्यालयों, भारतीय जनता पार्टी, उसके सहयोगी दलों और कॉरपोरेट दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।

एआईकेएससीसी के अलावा देश के 15 राज्यों के किसान संगठन सामूहिक तौर पर कृषि कानून और बिजली विधेयक के खिलाफ आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। इस आंदोलन की सफलता को सुनिश्चत करने के लिए संयुक्त समन्वय समिति का गठन किया गया है। जिसमें वी एम सिंह, योगेन्द्र यादव, राजू शेट्टी, बलबीर सिंह राजेवाल और गुरनाम सिंह को सदस्य मनोनीत किया गया है।

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