डिजिटल इंडिया में घाटे का सौदा साबित हो रही हैं डिजिटल फिल्म रिलीजिंग

कोरोना महामारी ने फिल्म इंडस्ट्री को करारा झटका दिया है। कोरोना के कहर के कारण हमेशा चकाचौंध रहने वाली मायानगरी थम सी गयी है।

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नईदिल्लीः कोरोना महामारी ने फिल्म इंडस्ट्री को करारा झटका दिया है। कोरोना के कहर के कारण हमेशा चकाचौंध रहने वाली मायानगरी थम सी गयी है। मायानगरी के मंद पड़ने का सबसे ज्यादा असर उद्योग जगत से लेकर बॉलीवुड इंडस्ट्री को पड़ा है।

कोरोना वायरस के कारण कई निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्म नेटफ्लिक्स और अमेजॉन जैसे OTT प्लेटफॉर्मस पर रिलीज कर रहे हैं। अभी तक वेब सीरिज के लिए मशहूर यह प्लेटफॉर्मस अब नई फिल्मों का अड्डा बन चुके हैं। बावजूद इसके इन प्लेटफॉर्मस पर सिनेमाघरों की तर्ज पर मुनाफा कमा पाना निर्माता-निर्देशक के लिए मुमकिन नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते कई लोग सिनेमाघरों को खोलने की मांग भी कर रहे हैं।

बॉलीवुड निर्माताओं की संस्था प्रोड्यूसर्स ऑफ गिल्ड की ओर से जारी एक बयान के अनुसार देश में लगे छह महीने के लॉकडाउन में फिल्म इंडस्ट्री को लगभग 9,000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है।

हालांकि यह घाटा सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री तक सीमित नहीं है। इसका असर देश के अलग-अलग सैक्टर में देखा जा सकता है। दरअसल फिल्म इंटस्ट्री प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के रुप में एक बड़ा भाग देश के सकल घरेलु उत्पाद (जीडीपी) में देती है। इसके साथ ही देश में 2 लाख से ज्यादा सिनेमाघर हैं, जिनकी पहुंच देश के हर जिले तक है। इन सिनेमाघरों में कई लाख कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनकी रोजी-रोटी इन पर निर्भर करती है।

वहीं अगर OTT प्लेटफार्म की बात करें तो सराकरी आंकड़े बताते हैं कि महज 30 फीसदी लोगों के पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। वहीं ग्रामीण भारत में यह आंकड़ा महज 15 फीसदी है। ऐसे में जाहिर है कि देश की आधी से ज्यादा आबादी इन प्लेटफॉर्मस का हिस्सा नहीं हैं।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते देशव्यापी लॉकडाउन में गुलाबो सिताबो, गुंजन सक्सेना, लूटकेस, सड़क 2 और शकुंतला देवी जैसी कई फिल्मों को ऑनलाइन रिलीज कर दिया गया था। बेशक इन फिल्मों को दर्शकों का खूब प्यार मिला लेकिन सिनेमाघरों के बंद होने के कारण देश का एक बड़ा तबका इन फिल्मों का भरपूर लुत्फ उठाने से अछूता रह गया।

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