Firecracker ban : ‘जीवन का अधिकार रोजगार के अधिकार से ऊपर’

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पटाखा निर्माताओं से कहा कि निर्दोष नागरिकों के जीवन का अधिकार उन श्रमिकों के रोजगार के अधिकार से अधिक कीमती है, जो 2018 के अदालत द्वारा पारंपरिक Firecracker के निर्माण और बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद नौकरी से बाहर हो गए हैं।

Firecracker बैन पर हो रही थी सुनवाई

अदालत निर्माताओं और नागरिकों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। निर्माताओं की ओर से पेश वरिष्ठ एएनएस नाडकर्णी ने शीर्ष अदालत से केंद्र को निर्देश जारी करने का आग्रह किया कि दिवाली से पहले बेहतर पटाखों को मंजूरी दी जाए क्योंकि उद्योग में काम करने वाले लाखों लोगों की आजीविका दांव पर है।

लेकिन जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एएस बोपन्ना की बेंच इस पर विचार करने के मूड में नहीं थी। उन्होंने कहा “रोजगार के अधिकार की आड़ में हम कुछ लोगों को नागरिकों के जीवन से खेलने की अनुमति नहीं दे सकते। हमें रोजगार के अधिकार और नागरिकों के जीवन के अधिकार के बीच संतुलन बनाना होगा। लेकिन हमारा मुख्य ध्यान पटाखों के इस्तेमाल से पीड़ित निर्दोष नागरिकों के जीवन के अधिकार की रक्षा करना है।

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