अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के लिए पांच जजों का चयन, नौ वर्ष का होगा कार्यकाल

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के लिए पांच जजों का चयन, नौ वर्ष का होगा कार्यकाल, नए साल से कार्य प्रारंभ

संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के लिए पांच न्यायाधीशों का चुनाव कर इनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की है। छह फरवरी 2021 से शुरू होगा जजों का कर्यकाल।

न्यायाधीशों का कार्यकाल

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर ने न्यायाधीशों के चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह जानकारी दी। इन न्यायाधीशों का कार्यकाल नौ वर्षों का होगा और यह छह फरवरी 2021 से शुरू होगा।

आईसीजे के लिए चुने गए न्यायाधीश

आईसीजे के लिए चुने गए न्यायाधीशों में यूजी इवासावा (जापान), जॉर्ज नोल्टे (जर्मनी), जूलिया सेबूटिंडे (युगांडा), पीटर टोमका (स्लोवाकिया) और शू हानकिन (चीन) शामिल हैं। इन सभी न्यायाधीशों ने महासभा और सुरक्षा परिषद दोनों में ही बहुमत प्राप्त किया।

कानूनी विवादों का निपटारा

आईसीजे का काम संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करना होता है। इसमें कुल 15 न्यायाधीश होते हैं जिनका चुनाव नौ वर्षों के कार्यकाल के लिए महासभा और सुरक्षा परिषद की ओर से किया जाता है।

क्या होता है संयुक्तराष्ट्र महासभा?

संयुक्त राष्ट्र के पांच मुख्य अंगों में से एक है। इस सभा का हर वर्ष सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ सम्मेलन होते है। इन प्रतिनिधियों में से एक को अध्यक्ष चुना जाता है। क्योंकि समान्य सभा में वह अकेला मुख्य अंग है जिसमें सब सदस्य देश सम्मिलित होते है, उसके सम्मेलन अधिकतर विवाद के मंच होते है।

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायधीश

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायधीश हैं, जो संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद के द्वारा चुने जाते है, जिनका कार्यकाल का होता हैं और इनको दुबारा भी चुना जा सकता है, हर तीसरे साल इन 15 न्यायधीशों में से पांच दुबारा चुने जा सकते है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में स्थायी प्रतिनिधि

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में किसी देश का कोई स्थायी प्रतिनिधि नहीं होता है. देश सामान्यतया अपने विदेश मंत्री के माध्यम से या नीदरलैंड में अपने राजदूत के माध्यम से रजिस्ट्रार से संपर्क करते हैं जो कि उन्हें कोर्ट में एक एजेंट के माध्यम से प्रतिनिधित्व प्रदान करता है।

लिखित आवेदन

आवेदक को केस दर्ज करवाने से पहले न्यायालय के अधिकार क्षेत्र और अपने दावे के आधार पर एक लिखित आवेदन देना पड़ता है। प्रतिवादी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करता है और मामले की योग्यता के आधार पर अपना लिखित उत्तर दर्ज करवाता है।

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