चारा घोटाला: झारखंड हाईकोर्ट से लालू को झटका, जमानत याचिका खारिज!

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पैरोल अवधि 3 महीने बढ़ाए जाने की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने उन्हें 30 अगस्त तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है।

दरअसल, चारा घोटाले में जेल की सजा काट रहे हैं। उन्हें इलाज के लिए 11 मई को छह हफ्ते की प्रोविजिनल बेल दी गई थी। जिसे बाद में 14 अगस्त तक बढ़ा दिया गया। इसके बाद इसे बढ़ाकर 27 अगस्त तक कर दिया गया। अब यह अवधि 27 अगस्त को खत्म हो रही है। लेकिन लालू ने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इसे 3 माह बढ़ाने की अपील की है। जिसे अदालत ने ठुकरा दिया है।

हाईकोर्ट ने कहा- करना होगा सरेंडर

मामले में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा- लालू यादव राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में इलाज कराएं। जरूरत पड़ी तो रिम्स के डॉक्टर हायर सेंटर अस्पताल से बात करेंगे। लालू यादव को सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में सरेंडर करना होगा। वहीं, लालू के वकील प्रभात कुमार ने कहा कि उन्हें मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टिट्यूट से सीधे रिम्स लाया जाएगा। गौरतलब हो कि लालू यादव को मई में इलाज के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई थी जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने बढ़ा दिया था।

मिली थी 6 हफ्ते की बेल, जो बढ़ती गई

दरअसल, 10 अगस्त को हाईकोर्ट ने लालू के जमानत के दौरान घर में रहने पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा था कि चारा घोटाल केस में सजायाफ्ता हैं, तबीयत खराब हे तो वह अस्पताल में रहें। ठीक हैं तो जेल में। घर पर रहकर सुविधाएं नहीं ले सकते।

चारा घोटाला मामले में मिली है 14 साल की सजा

चारा घोटाले के एक मामले में दिसंबर 2017 को दोषी करार दिए जाने के बाद लालू रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में रखे गए थे। उन्हें जनवरी व मार्च 2018 में दो अन्य मामलों में दोषी करार दिया गया और 14 साल की जेल की सजा दी गई। वह साल 2013 में चारा घोटाला मामले में पहली बार दोषी करार दिए गए थे और उन्हें पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। करोड़ों रुपये का चारा घोटाला लालू यादव के बिहार के मुख्यमंत्री रहने के दौरान 1990 के दशक में सामने आया था। पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपा गया था।

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