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पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का बड़ा आरोप, प्रशासन के दम पर DDC सदस्यों को खरीदने की कोशिश कर रही बीजेपी

श्रीनगर, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने मंगलवार को बड़ा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) नव निर्वाचित जिला विकास परिषद (DDC) के सदस्यों की वफादारी में बदलाव करने और उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए प्रशासन का इस्तेमाल कर रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने डीडीसी (DDC) का चुनाव जीतने वाले पीडीपी नेताओं के सम्मान में आयोजित एक समारोह के इतर संवाददाताओं से कहा,“वे (भाजपा) बार-बार दावा कर रहे हैं कि डीडीसी (DDC) का चुनाव आयोजित कर जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) में लोकतंत्र (Democracy) को फिर से बहाल किया गया है। लेकिन चुनाव परिणामों की घोषणा होने के बाद वे जो कुछ कर रहे हैं वह लोकतंत्र का माखौल है। वे स्थानीय प्रशासन का इस्तेमाल पीडीपी, नेशनल कांफ्रेंस, निर्दलीय एवं अन्य पार्टियों के नवनिर्वाचित डीडीसी के सदस्यों को ब्लैकमेल करने के लिए कर रहे हैं।”

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पीडीपी नेता ने आरोप लगाया कि अन्य पार्टियों और निर्दलीय डीडीसी सदस्यों को पाला बदलने के लिए पैसे की पेशकश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया,“यदि वे इसपर सहमत नहीं होते हैं तो उन्हें आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दी जाती है। दुर्भाग्य से कुछ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी भी इसमें शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि अधिकारी इस प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में जुटे हुए हैं। वे डीडीसी सदस्यों को उठाते हैं तथा भाजपा के छद्म पार्टियों के कार्यालय में बंद कर दिये जाते हैं जहां उन्हें धमकाया और रिश्वत देने की कोशिश की जाती है।”

महबूबा मुफ्ती ने कहा कि चुनावों में मतदाताओं की व्यापक भागीदारी के बाद ऐसी कार्रवाई शर्मनाक है। उन्होंने कहा,“प्रदेश में चुनाव कराने के जरिये किये गये सभी अच्छे काम बर्बाद हो रहे हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद पीडीपी की युवा इकाई के अध्यक्ष वाहीद-उर-रहमान पारा, जिसे आतंकवादी मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने गिरफ्तार किया है, को डीडीसी सदस्य के बतौर सोमवार को शपथ नहीं लेने दिया गया। उन्होंने कहा,“मुझ पर दबाव बनाने के लिए वाहिद को गिरफ्तार किया गया है। छह राइफलों के साथ गिरफ्तार व्यक्ति को भाजपा की छद्म पार्टी में शामिल होने के बाद आजाद कर दिया गया तथा उनके मामले को भी वापस ले लिया गया। लेकिन अदालत के आदेश के बावजूद वाहिद को ऑनलाइन शपथ लेने की इजाजत नहीं दी गयी।”

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