व्यापम घोटाले के आरोपी पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत जमानत पर छूटे

Laxmikant Sharma

भोपाल। व्यापम घोटाले के मुख्य आरोपी और मध्यप्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा को रविवार सुबह रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई के दौरान भोपाल केंद्रीय जेल के बाहर जश्न का माहौल था। परिजनों और समर्थकों ने फूल मालाएं पहना कर जोरदार स्वागत किया गया।

जेल के बाहर समर्थकों की भीड़
शर्मा की रिहाई के दौरान केंद्रीय जेल के बाहर सैकड़ों समर्थकों की भीड़ थी। लक्ष्मीकांत शर्मा के समर्थन में जोरदार नारेबाज़ी देखी गई। लक्ष्मीकांत शर्मा को शनिवार को ही रिहा होना था, लेकिन कागज़ी कार्रवाई पूरी नहीं होने की वजह से रविवार की सुबह उन्हें रिहाई मिल पाई।

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40 से ज्यादा लोगों की हुई मौत
व्यापम घोटाले में अब तक 40 से ज्यादा लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई और लक्ष्मीकांत शर्मा जेल जाने वालों में सबसे बड़े अहम आरोपी थे। पूर्व मंत्री पर व्यापम से जुड़े 7 मामलों में केस दर्ज है। अब तक उन्हें दूसरे छह मामलों में जमानत मिल चुकी थी। गुरुवार को हाईकोर्ट ने उन्हें सातवें केस में भी जमानत दे दी। लक्ष्मीकांत शर्मा के साथ इस केस से जुड़े दूसरे आरोपियों को भी रिहाई मिली है, जिनमें पूर्व सरकारी अधिकारी रामनरेश यादव और धनराज यादव के नाम शामिल हैं।

क्या है व्यापम घोटाला ?
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े व्यापम भर्ती घोटाले से जुड़े 40 से ज्यादा आरोपियों की संदिग्ध मौत हो चुकी है. यही वजह है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमलावर है और सीबीआई जांच की मांग कर रही है। व्यापम के तहत सरकारी नौकरियों और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए हुआ था एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़। 55 केस, 2,530 आरोपियों और 1,980 गिरफ्तारियों के साथ इसे खूनी घोटाला भी कहा जाने लगा है।

सात जुलाई को उठा था पर्दा
इस घोटाले से सबसे पहले पर्दा तब उठा जब 7 जुलाई, 2013 को मध्य प्रदेश के इंदौर में पीएमटी की प्रवेश परीक्षा में कुछ छात्र फर्जी नाम पर परीक्षा देते पकड़े गए। इसके साथ ही पुलिस ने इसके मास्टरमाइंड डॉक्टर जगदीश सागर को गिरफ्तार किया। डॉक्टर जगदीश सागर की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि मध्य प्रदेश का व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम का दफ्तर इस धंधे का अहम अड्डा है।

दो हिस्सों में बंटा है यह घोटाला
उच्च शिक्षा मंत्री के तहत काम करने वाला व्यावसायिक परीक्षा मंडल मेडिकल, इंजीनियरिंग और दूसरी व्यावसायिक पढ़ाई के साथ सरकारी नौकरियों के लिए प्रवेश परीक्षाएं करवाने और छात्रों के चयन का काम करता है। व्यापम घोटाला दो हिस्सों में बंटा हुआ है। पहला तो ये कि मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रवेश परीक्षाओं में धांधली हुई। वहीं दूसरा सरकारी नौकरियों के लिए हुई परीक्षाओं में भी गड़बड़ी करके नाकाबिल लोगों को नौकरी दी गई।

शिक्षा मंत्री से लेकर कई लोग हैं शामिल
व्यापम मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्य मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के अधीन था-घोटाले के तार लक्ष्मीकांत शर्मा से जुड़ रहे थे। उन्हें भी गिरफ्तार किया जा चुका है। साथ ही घोटाले के कर्ताधर्ता उनके ओएसडी ओ पी शुक्ला, व्यावसायिक परीक्षा मंडल के नियंत्रक पंकज त्रिवेदी, ऑनलाइन विभाग के सर्वेसर्वा नितिन महिंद्रा पर शिकंजा कसा जा चुका है। इनकी ही मिलीभगत से भर्ती घोटाले का खेल चल रहा था।

पूर्व राज्यपाल भी शामिल
आरोप है कि सिफारिश करने वालों में राज्यपाल रामनरेश यादव, उनके बेटे शैलेश यादव, ओएसडी धनराज यादव, केंद्रीय मंत्री उमा भारती से लेकर संघ के सुरेश सोनी, केसी सुदर्शन और वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

शुरु हुआ मौत का सिलसिला
इस बीच घोटाले से जुडे आरोपियों की संदिग्ध मौत का सिलसिला भी शुरू हो गया। एमपी के राज्यपाल रामनरेश यादव के बेटे शैलेश यादव की भी 24 मार्च को लखनऊ में संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी।

सीएम ने दिए जांच के आदेश
मामले की जांच कर रही एसटीएफ की निगरानी के लिए हाईकोर्ट ने एसआईटी बनाई है। कांग्रेस सीबीआई जांच की मांग कर रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस मामले की जांच शुरू कराने का श्रेय खुद को देते हैं। जबकि कांग्रेस घोटाले का आरोप मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर लगा चुकी है।

पूर्व विधायक ने किए खुलासे
इस बीच रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने व्यापम घोटाले पर ‘व्यापमगेट’ नाम से एक किताब भी लिखी है. इसमें उन्होंने घोटाले से जुड़े 250 अधिकारियों समेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ सबूत पेश करने का दावा किया है।

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