पूर्व पाक सीनेटर का दावा, तालिबान के जरिए अफगानिस्तान में हिंसा को बढ़ावा दे रहा पाकिस्तान

इस्लामाबाद, पाकिस्तान के एक पूर्व सीनेटर ने कहा है कि इस्लामाबाद तालिबान के माध्यम से अफगानिस्तान में अपने हितों को साधने में लगा है। पूर्व सीनेटर दावा किया कि शांति प्रक्रिया के प्रति इस्लामाबाद का दृष्टिकोण अपरिवर्तित रहा है, और पाकिस्तान अभी भी अफगानिस्तान में हिंसा को बढ़ावा दे रहा है।

पाकिस्तान के पूर्व सीनेटर और क्षेत्रीय मामलों के विश्लेषक अफरासिएब खट्टक ने टोल न्यूज से कहा कि पाकिस्तान का लक्ष्य रणनीतिक गहराई हासिल करने की दृष्टि से अफगानिस्तान को नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा,“ पाकिस्तान ” रणनीतिक गहराई के बहाने अफगानिस्तान में प्रभुत्व चाहता हैं और उन्होंने इस नीति का अनुसरण किया है। वे तालिबान को अपने लिए एक उपकरण के रूप में देखते हैं।”

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खट्टक ने कहा कि अमेरिका के साथ शांति प्रक्रिया के लिए सहमत होने के बावजूद तालिबान ने हिंसा नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा, “ हम कह सकते हैं कि तालिबान के रवैये में बदलाव आया है अगर वे हिंसा रोकते हैं और कहते हैं कि वे लोगों के दर्द को महसूस करेंगे।”

खट्टक के विचार ऐसे समय में आये हैं जब तालिबान के उप राजनीतिक नेता अब्दुल गनी बरादर का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह पाकिस्तान के कराची में तालिबान सदस्यों को संबोधित कर रहा है। बारादार को यह कहते सुना गया है कि तालिबान के नेतृत्व और पाकिस्तान में तालिबान के मौलवी परिषद के परामर्श से शांति प्रक्रिया के बारे में सभी निर्णयों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बरादर ने कहा कि तालिबान का नेतृत्व पाकिस्तान में मौजूद है। बारादार ने पिछले हफ्ते पाकिस्तान का दौरा किया था, वीडियो उसी यात्रा से संबंधित है।

अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को लगाई फटकार

अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को पाकिस्तान में बारादार के वीडियो पर प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि पाकिस्तान में तालिबान नेताओं और उनके लड़ाकों की मौजूदगी ‘अफगानिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता का स्पष्ट उल्लंघन है।’
मंत्रालय ने पाकिस्तान से विद्रोहियों को अफगानिस्तान के खिलाफ अपने क्षेत्र का उपयोग करने से रोकने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि विद्रोहियों और आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को बंद करना अफगानिस्तान में संकट के शांतिपूर्ण अंत के लिए महत्वपूर्ण है।

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