पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री दिलीप रे को तीन साल की सजा

नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय राज्य मंत्री रहे दिलीप रे को सेन्ट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन की एक विशेष अदालत ने दोषी करार देते हुए तीन साल की सजा सुनाई है। और साथ में 10 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया है। इन्हें अपराधिक साजिश करने का दोषी पाया गया है।

इनके अलावा उस समय अधिकारी पद पर कार्यरत प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्यानंद गौतम, कोस्ट्रोन माइनिंग लिमिटेड(सीटीएल) निदेशेक महेंद्र कुमार अग्रवाल और कैस्ट्रॉन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड(सीएमएल) को भी कोयला घोटाले में अदालत ने 6 अक्टूबर को दोषी करार दिया था। हालांकि उस वक्त क्या सजा दी जाएगी इसका फैसला नहीं किया गया। दिल्ली की विशेष अदालत ने सीटीएल पर 60 लाख और सीएमएल पर 10 लाख का जुर्माना लगाया है।

बीजेपी सरकार में दिलीप रे कोयला राज्य मंत्री थे। उन पर झारखंड कोयला ब्लॉक के आवंटन में अनियमितता और हेरा फेरी के लिए 1999 में केस दर्ज किया गया था। लम्बे समय तक मुकदमा चलने के बाद न्यायाधीश भरत पराशर ने उन्हें भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत और अन्य को धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया है।

दिलीप रे बीजू जनता दल(बीजेडी) के संस्थापक हैं जो कि बीजू पटनायक के काफी करीबी थे। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया। दिलीप रे राउरकेला से 2014 में विधायक भी रह चुके हैं। 2019 के चुनाव से पहले इन्होनें यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि नरेंद्र मोदी ने विकास के लिए किया वादा नहीं निभाया है।

इसके बाद यह अटकलें लगायी जा रहीं थी कि यह फिर से अपनी पुरानी पार्टी बीजेडी में शामिल हो जाएंगे पर उसके बाद दिलीप रे किसी भी पार्टी में शामिल नहीं हुए।

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