अयोध्या की विवादित जमीन उगलती रही है सबूत, मिल चुके है राम मंदिर के 85 पिलर और कई मूर्तियां

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नई दिल्ली: अयोध्या के विवादित ढ़ांचे बाबरी मस्जिद मामले में भले ही सुप्रीम कोर्ट अभी किसी फैसले तक नहीं पहुंच सकी है, लेकिन यह विवादित जमीन समय-समय पर ऐसे सबूत उगलती रही है जिसने हमेशा इसी ओर इशारा किया है कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद राम मंदिर पर ही बनाई गई है। दरअसल, जब से राम मंदिर और बाबरी मस्जिद का यह विवाद शुरू तक है तब से लेकर अब तक दो बार विवादित जमीन की खुदाई हो चुकी है और दोनों बाद जमीन के अन्दर से मंदिर के अवशेष प्राप्त हुए है।

इस विवादित जमीन की पहली बार सन 1977 में खुदाई हुई थी। उस वक्त खुदाई से समय विवादित जमीन पर बाबरी मस्जिद अपना सिर उठाए हुए थी। उस वक्त प्रोफेसर बीबी लाल  ASI के चीफ थे और खुदाई करने वाली टीम में केके मोहम्मद अधिकारी के तौर पर कार्यरत थे। इस खुदाई में ASI को जमीन के नीचे 14 पिलर मिले मिले थे। इन सारे पिलर की बनावट तो मंदिर की ओर इशारा कर रही थी लेकिन इसोअर टिकी थी बाबरी मस्जिद।

1977 में मस्जिद के बाहर पिलर बेस मिले जो एक लाइन में थे और बराबर दूरी पर थे। इस तरह के पिलर बेस और उसकी संरचना मंदिरों में मंडप बनाने के लिए इस्तेमाल होती है। इन पिलर्स पर हिन्दू पूजा पद्धति के चिन्ह भी साफ दिख रहे हैं। इन पत्थर के पिलर्स पर मूर्तियां भी हैं। हालांकि उस वक्त पिलर्स पर बाबरी मस्जिद विद्यमान थी इसलिए यह पता नहीं लगाया जा सका कि ये पिलरबेस कहां तक जाते हैं।

वर्ष 1992 में कल्याण सिंह के शासनकाल के दौरान राजनैतिक, प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव ने इस मामले को हिंसक रूप दे दिया था और कार्यसेवकों ने बड़ा कदम उठाते हुए इस बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था। इसके बाद वर्ष 2003 में एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन की खुदाई का आदेश सुना दिया। उस समय जमीन पर से बाबरी मस्जिद का नाम-ओ-निशां तक मिट चुका था।

इस बार ASI अधिकारी बीआर मणि ने इस विवादित जमीन की खुदाई का नेतृत्व किया। इस बार बीआर मणि के आदेश पर उस जगह की भी खुदाई हुई जहां बाबरी मस्जिद खड़ी थी। खुदाई में सबसे पहले पिलरबेस मिले। इस बार खुदाई में 85 पिलरबेस मिले। यानि मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनी और उसके पिलर्स का इस्तेमाल हुआ और मंडप के खंभों को तोड़ पर उस जमीन को समतल कर दिया गया।

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