मिल गयी नयी तकनीक, मरने के बाद फिर जिंदा हो पाएंगे लोग

यह सच है कि मरने वाले कभी लौटकर नहीं आते, लेकिन इस सच को एक 14 साल लड़की ने इसे झूठा साबित करने के लिए हर संभव कोशिश में जुट गई। ब्रिटेन की इस लड़की ने लाइलाज बीमारी कैंसर से पीड़ित थी। बावजूद इसके वह मरने के बाद भी जीवन को पाना चाहती थी।

अपनी इस अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए उसने कानून का दरवाजा भी खटखटाया और उसके इस अनोखे अपील कोर्ट ने भी मुहर लगा दी। शायद यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है जहां किसी लड़की ने साफ -साफ बताया कि उसे मरने के बाद भी उसे किस तरह लम्बे समय तक के लिए जिंदा रखा जा सकता है।

मुझे मरने के बाद नहीं दफनाया जाए

इस लड़की ने कहा कि क्रायोनिक प्रक्रिया ने मेरे भीतर एक उम्मीद जगाया है। मैं 14 साल की हूं और जीना चाहती हूं। लेकिन मैं मरने वाली हूं। साथ ही उसने कहा कि मैं नहीं चाहती कि मेरे शरीर को जमींदोज कर दिया जाए। उसे उम्मीद थी कि शायद एक दिन जब कैंसर का इलाज संभव हो जाएगा तो वो फिर से जीवित हो जाएगी।

इस लड़की की हाल ही में कैंसर से मौत हो गई है। लड़की ने ब्रिटेन के एक जज को अपनी लिखी एक चिट्ठी में कहा कि, मैं जीना चाहती हूं और लंबे समय तक जीना चाहती हूं। मुझे उम्मीद है कि भविष्य में कैंसर से मुक्ति मिल जाएगी। उस दिन वे मुझे जगा सकते हैं, ताकि मैं फिर से जिंदा हो सकूं।

उसका  कहना था कि उसके शरीर को क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक के जरिए सहीसलामत रखा जाए। लड़की ने जज को लिखे पत्र में कहा कि, क्रायोप्रिजर्व होने से मुझे इलाज का मौका मिल सकता है और  मैं इस मौके को खोना नहीं चाहती हूं। इस प्रक्रिया के तहत मैं सैकड़ो साल भी बीमारी का इलाज आ जाने के बाद अपना जीवन पा सकती हूं।

32 लाख रुपए खर्च होंगे इस प्रक्रिया में

अदालत ने लड़की के मां को उसके शव पर आखिरी फैसला लेने के लिए छोड़ दिया है। जज ने बताया कि लड़की ने 46000 डॉलर के खर्च वाले बुनियादी विकल्प को चुना है। इसके लिए उसने काफी रिसर्च भी किया था। लेकिन फिलहाल लंदन में इस तरह की तकनीक मौजूद नहीं है। यही वजह है कि लड़की के शव को अमेरिका मिशिगन स्थित क्रायोनिक्स इंस्टीट्यूट ले जाया गया है। जहां क्रायोनिक्स तकनीक के मदद से लाइलाज बीमारियों से मरने वाले लोगों के शव को डीप फ्रीज कर सुरक्षित रखा जाता है। इस पूरे प्रक्रिया में लगभग 32 लाख रुपए का खर्च आता है।

 -196 डिग्री तापमान में लड़की को रखा जाएगा

इस प्रक्रिया में शव को 0 से 196 डिग्री तापमान में रखा जाता है जिससे कि इंसान के दिमाग को सुरक्षित रखा जा सके। जिसे इंसान के मौत होने के 2 मिनट से लेकर अधिकतम 15 मिनट के भीतर शुरू कर दी जाती है। 2 से 3 सप्ताह तक शरीर को तरल नाट्रोजन में ठंडा करते है ताकि बीमारी का इलाज संभव होने के बाद इंसान को फिर से जीवित किया जा सके।

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