बेजुबान पक्षियों की दोस्ती से छूटी शराब की लत

280a32fc-f31a-46b2-b8f0-9eb941200d3fकानपुर। बेजुबानों की दोस्ती ने एक व्यक्ति के जीवन को नया रूप दे दिया है। सुबह से घर में दोस्त पक्षियों की चहचहाट गूंजने लगती है। प्राकृतिक सुख ने उसे इन बेजुबान मेहमानों का मेजबान बना दिया है। जो रोज सुबह उनके लिए दाने डालकर अपनी दोस्ती का फर्ज निभा रहा है। हालांकि बेजुबान पक्षियों की इस दोस्ती ने उन्हें गिफ्ट भी दिया है। अब उन्हें देर रात तक चलने वाली नशे की पार्टियों से निजात मिल गई है।

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शहर के गोविन्द नगर निवासी जितेंद्र ओबराय की जीवन शैली पन्द्रह साल पहले विलासिता की थी। देर रात तक क्लबों की पार्टियों और शराब के नशे में मशगूल रहना फिर सुबह देर से उठना और उसके बाद फिर शाम होते ही वही दिनचर्या।

क्‍या कहते हैं जितेंद्र ओबराय

वह बताते हैं कि उनके पिता पक्षियों को दाना डालते थे। तो कभी कभी वह भी शौकिया करने लगे। लेकिन वर्ष 2000 से इस काम को उन्होंने अपनी दिनचर्या बना ली। इसके लिए सुबह जल्दी उठना पड़ता था। नींद पूरी करने के लिए रात में जल्दी सोना भी होता था। जिससे धीरे धीरे क्लब व पार्टियों से दूरी बनती गई। नशे की भी आदत छूट गई।

अब तो पक्षी ही दोस्त

छत पर पक्षियों को दाना देना इनकी दिनचर्या का सबसे महत्वपूर्ण कार्य बन गया है। उन्हें खिलाने के बाद ही वह नाश्ता करते हैं। उनके छत पर पहुंचने से पहले ही उनके बेजुबान मित्रों की टोलियां आ जाती हैं। जैसे ही वह आओ आओ की आवाज लगाते हैं। वैसे ही सैकड़ों की संख्या चिड़िया, कौवे, गौरैया, कबूतर व गिलहरी दाना चुगने आ जाते हैं। कई बार तो यह बेजुबान दोस्त उनके हाथों में बैठ कर उनसे अपना प्रेम जताने से भी नहीं हिचकते। सुबह मोहल्ले में पक्षियों के शोर से अजीब प्राकृतिक माहौल का लोग मजा उठाने लगे हैं।

बनता जा रहा है कारवां

जितेंद्र की इस मुहिम को परिवार व मोहल्ले वालों का भी साथ मिलने लगा है। जिसके चलते अब मुहल्ले में भी कई लोग पक्षियों को दाना देने लगे हैं। जिससे जहां इन बेजुबानो का पेट भर रहा है वहीं आधुनिकता के इस समय में लोगों को सुकून मिलता है। साथ ही विलुप्त हो रही पक्षियों की इन प्रजातियों को पेट भरने का सहारा भी मिल रहा है।

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