उम्रकैद के साथ इन अधिनियमों के तहत बलात्कारी आसाराम को दोषी ठहराया गया

नई दिल्ली। आध्यात्मिक गुरु और कथावाचक आसाराम को नाबालिग लड़की से रेप केस में दोषी ठहराया गया है। इस मामले में आसाराम सहित तीन अन्य लोगों अदालत ने दोषी करार दिया है। आसाराम के अलावा उनकी राजदार शिल्पी, शरतचंद्र को भी इस मामले में दोषी करार दिया गया है।

आसाराम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 और यौन अपराध बाल संरक्षण अधिनियम (पोस्को) और किशोर न्याय अधिनियम (जेजे) के तहत दोषी ठहराया गया। पुलिस द्वारा छह नवंबर 2013 को पोस्को अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आसाराम और चार अन्य सह- आरोपियों शिल्पी, शरद, शिवा और प्रकाश के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

जिसके बाद आज यानी 25 अप्रैैल को आरोपी आसाराम को कोर्ट ने सजा सुना दी है। सज़ा सुनाते हुए बलात्कारी बाबा आसाराम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। आसाराम (77) को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 और बाल यौन अपराध निषेध अधिनियम (पोस्को) और किशोर न्याय अधिनियम (जेजे) के तहत दोषी ठहराया गया। दो अन्य सह-आरोपियों को भी दोषी ठहराया गया।

पुलिस ने छह नवंबर, 2013 को पोस्को अधिनियम , किशोर न्याय अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत आसाराम और चार अन्य सह- आरोपियों शिल्पी, शरद, शिवा और प्रकाश के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया था। जानकार सूत्रों ने बताया कि अदालत ने शिल्पी (आश्रम की वॉर्डन) और शरद को भी दोषी ठहराया है, जबकि शिवा और प्रकाश को इस मामले में बरी कर दिया है।

आसाराम गुजरात में दायर यौन उत्पीड़न के एक अन्य मामले का भी सामना कर रहे हैं। विशेष न्यायाधीश शर्मा ने जोधपुर की अदालत में सात अप्रैल को इस मामले में अंतिम बहस पूरी कर ली थी और फैसला सुनाने के लिए 25 अप्रैल (बुधवार) की तिथि निर्धारित की थी।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक किशोरी द्वारा शिकायत दर्ज कराने के बाद 2013 में आसाराम को गिरफ्तार किया गया था। किशोरी ने उन पर जोधपुर के बाहरी इलाके के मनई गांव स्थित आश्रम में 15 अगस्त, 2013 को उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। पीड़िता मध्य प्रदेश के उनके छिंदवाड़ा आश्रम में 12वीं कक्षा की छात्रा थी।

आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार कर एक सितंबर, 2013 को जोधपुर लाया गया था। दो सितंबर, 2013 को उन्हें न्यायायिक हिरासत में भेज दिया गया था।इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।

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