शीतकालीन यात्रा में भी दिख रहा गजब का उत्साह

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रुद्रप्रयाग। शीतकालीन यात्रा को लेकर प्रदेश स्तर पर काफी जोश दिख रहा है। बीते वर्ष की तुलना में इस बार भक्तों का रूझान भी बदला-बदला दिख रहा है। इस वर्ष यात्रियों की संख्या में काफी वृद्धि हो रही है। यात्रियों की आवक बढ़ने से व्यवसाईयों को अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है। अभी तक केदारनाथ के कपाट बंद होने के डेढ़ माह में पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में नौ हजार से ज्यादा यात्री बाबा के दर्शनों को पहुंच चुके हैं।

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2013 में आयी आपदा के अगले साल यानी 2014 से प्रदेश सरकार ने शीतकालीन यात्रा की शुरुआत का फैसला लिया था। जो इस वर्ष भी संचालित हो रही है। 13 नवंबर को भैयादूज के अवसर पर विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद हुए थे। शीतकाल के छह माह तक पंचगद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है। पहले प्रचार-प्रसार की कमी के चलते यहां काफी कम संख्या में यात्री दर्शनों के लिये आते थे। लेकिन जब से शीतकाल में भी यात्रा शुरु हुई तब से यात्रियों की संख्या में खासी वृद्धि देखी जा रही है।

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पिछले वर्ष शीतकाल के पूरे सीजन में 13,452 यात्रियों ने बाबा केदार के दर्शन किए थे। जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा डेढ़ माह में ही 9234 पर पहुंच चुका है। शीतकालीन यात्रा शुरू होने से विभिन्न पड़ावों पर आस लगाए सैकड़ों लोगों को रोजगार की उम्मीद भी जगी है। आपदा से पहले केवल छह महीने ही चारधाम यात्रा संचालित होती थी। जिसके बाद यहां का कारोबार पूरी तरह ठप हो जाता था। लेकिन पिछले साल से अबतक काफी कुछ बदलाव दिख रहे हैं।

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वैश्विक स्तर पर अगर शीतकालीन यात्रा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाय तो आने वाले समय में शीतकाल में भी यात्रियों की संख्या में काफी वृद्धि होने की उम्मीद है। जिससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही यहां के युवाओं को पूरे वर्ष के लिये रोजगार भी मिल सकेगा और पलायन की समस्या का भी समाधान होगा। इसके अलावा मंदिर समिति की आय में भी वृद्धि होगी। बदरी-केदार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी बी डी सिंह का कहना है कि ‘शीतकालीन यात्रा के सफल संचालन के लिये बदरी-केदार समिति भी पूरा प्रयास कर रही है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष यात्रियों की संख्या में काफी वृद्धि देखी जा रही है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना है।’

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