GDA का सीएम हरीश रावत को नोटिस

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गाजियाबाद। GDA यानी गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत को नोटिस भेजा है। GDA ने नोटिस में इंदिरापुरम क्षेत्र में सीएम रावत के नाम पर दर्ज मकान के लेआउट प्लान में बदलाव करने पर जवाब मांगा है। नोटिस में सीएम रावत से 15 जनवरी को GDA कार्यालय में हाजिर होकर अपना पक्ष रखने को भी कहा गया है।

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GDA को निर्माण पर नहीं मिला कोई जवाब –

मामला इंदिरापुरम के ज्ञान खंड में प्लाट नं जीके- I/165 से जुड़ा है। ये प्लाट सीएम रावत को वर्ष 1995-96 में आवंटित किया गया था और 2005 में उनके नाम पर रजिस्टर्ड हुआ था। जीडीए के रिकार्ड्स के मुताबिक सीएम रावत इस प्लाट के मालिक हैं। नोटिस में इस बात का भी जिक्र है कि मकान के संबंध में वर्ष 2014 में एक कम्पलीशन सर्टिफिकेट भी जारी किया गया था। हालांकि बाद में इसी मकान के कुछ हिस्सों में अलग से निर्माण कराया गया और बेसमेंट में भी बदलाव किये गये। जीडीए अधिकारियों ने मकान के निरीक्षण के दौरान इन बातों को सही पाया और वहां मौजूद लोगों से इस बारे में पूछा लेकिन कोई भी जवाब नहीं दे सका, जिसके आधार पर ये नोटिस सीएम रावत के नाम पर जारी किया गया।

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नोटिस में सीएम हरीश रावत से कहा गया है कि अतिरिक्त निर्माण और बदलावों के चलते यूपी अर्बन प्लानिंग और डेवलेपमेंट एक्ट 1973 का खुला उल्लंघन किया गया है, इसलिये क्यों न उन हिस्सों को ढहा दिया जाय। नोटिस के संबंध में जीडीए के वाइस चेयरमैन विजय यादव ने किसी भी प्रकार की जानकारी से इंकार करते हुए कहा कि रेगुलर चेकिंग के तहत ही जीडीए द्वारा नोटिस जारी की जाती है, बावजूद इसके वे अपने स्तर पर पता लगायेंगे कि किस अधिकारी द्वारा सीएम रावत के खिलाफ नोटिस जारी की गयी।

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खास बात ये भी है कि दो साल पहले 2014 में भी ये प्लाट सुर्खियों में तब आया था, जब इसको फर्जी तरीके से एक स्थानीय समाजवादी पार्टी नेता को बेचने की कोशिश की गयी थी। जीडीए के ही पांच अधिकारियों ने मिलीभगत करके सपा नेता से 25 लाख रूपये का एडवांस भी ले लिया था, हालांकि संबंधित प्लाट को दिखाने में अधिकारी हीलाहवाली करते रहे जिससे सपा नेता को शक हो गया। मामला उजागर होने के बाद जीडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच की और पाया कि दो सुपरवाइजर और तीन क्लर्क इस फर्जीवाड़े में शामिल थे, जिनके खिलाफ कार्रवाई भी की गयी। जीडीए की जांच में ये भी पता चला कि सीएम हरीश रावत संबंधित प्लाट में नहीं रहते और उन्हें इस प्रकार की धोखाधड़ी की कोई जानकारी नहीं है।

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