GDP ग्रोथ में तीसरी तिमाही में मामूली सुधार, दिसंबर तिमाही में 4.7 फीसद रहा आंकड़ा

नई दिल्ली: चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही यानी अक्टूबर-दिसंबर में देश की आर्थिक GDP विकास दर 4.5 फीसदी से बढ़कर 4.7 फीसदी हो गई है. इससे पहले जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ घटकर 4.5 फीसदी के स्तर पर आ गया थी. आपको बता दें कि मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 में छह महीने बाद जीडीपी विकास दर में ग्रोथ लौटी है. एक्सपर्ट्स का कहना हैं कि आर्थिक आंकड़ों में सुधार अच्छा संकेत है.


जीडीपी किसी भी देश की आर्थिक सेहत को मापने का सबसे जरूरी पैमाना है. जीडीपी किसी खास अवधि के दौरान वस्तु और सेवाओं के उत्पादन की कुल कीमत है. भारत में जीडीपी की गणना हर तीसरे महीने यानी तिमाही आधार पर केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय यानी सीएसओ देशभर से उत्पादन और सेवाओं के आंकड़े जुटाता है इस प्रक्रिया में कई सूचकांक शामिल होते हैं, जिनमें मुख्य रूप से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई हैं.

अगर साल 2011 में देश में सिर्फ 100 रुपये की तीन वस्तुएं बनीं तो कुल जीडीपी हुई 300 रुपये. और 2017 तक आते-आते इस वस्तु का उत्पादन दो रह गया लेकिन क़ीमत हो गई 150 रुपये तो नॉमिनल जीडीपी 300 रुपये हो गया. यहीं बेस ईयर का फॉर्मूला काम आता है. 2011 की कॉस्टेंट कीमत (100 रुपये) के हिसाब से वास्तविक जीडीपी हुई 200 रुपये. अब साफ़-साफ़ देखा जा सकता है कि जीडीपी में गिरावट आई है.

इसी तरह आईआईपी के आंकड़े वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाला विभाग जुटाता है. सीएसओ इन सभी आंकड़ों को इकट्ठा करता है फिर गणना कर जीडीपी के आंकड़े जारी करता है. मुख्य तौर पर आठ औद्योगिक क्षेत्रों के आंकड़े जुटाए जाते हैं. ये हैं- कृषि, खनन, मैन्युफैक्चरिंग, बिजली, कंस्ट्रक्शन, व्यापार, रक्षा और अन्य सेवाएं. होती है.

Related Articles