गोंडा: मूर्ति कारीगरों की हालत खस्ताहाल, भक्तों को स्थापना के लिए नहीं मिल पा रही प्रतिमाएं

गोंडा: मूर्ति कारीगरों की हालत खस्ताहाल, भक्तों को स्थापना के लिए नहीं मिल पा रही प्रतिमाएं

गोण्डा: उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले में भक्तों की परेशानियां बढती ही जा रही है। प्रशासन ने काफी देरी से त्योहारों को दैहिक दूरी के पालन संग मनाने की सशर्त अनुमति दे तो दी है, पर इस देरी का खामियाजा भक्तो को भुगतना पड़ रहा है। अनुमति मिलने में देरी के कारण भक्तो को स्थापना के लिए मूर्ति नहीं मिल पा रहे है।

बार-बार अनुरोध करने पर भी प्रशाशन ने नहीं दी थी मूर्ति निर्माण की इजाजत

बता दें की गणेश महोत्सव के पूर्व ही पुलिस द्वारा मूर्तियों के निर्माण के लिये सख्ती से मनाही कर दी गयी थी। मूर्तिकारों के बार-बार अनुरोध करने पर भी प्रशाशन ने मूर्ति निर्माण की इजाजत नहीं दी थी। जिसके बाद साहबगंज मोहल्ले के जीवनलाल व झंझरी ब्लाक के निकट के रहने वाले ईश्वर नाथ को भूखों मरने की नौबत आ गई थी। जिसके कारण बाराबंकी के मसौली में धड़ल्ले से निरंतर दुर्गा प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार के यहां उन लोगो को कारीगरी करनी पड़ी।

नवरात्रि के दो दिन पूर्व जारी हुई मूर्ति स्थापना की गाइडलाइन

मूर्तिकार जीवनलाल ने कहा कि भले ही जिला प्रशासन द्वारा तीन फुट तक की दुर्गा प्रतिमाओं को घरों में दैहिक दूरी संग स्थापित करने की अनुमति दे दी गई है। लेकिन योगी सरकार की मंशा के अनुरूप देवीभक्त इस बार दुर्गा प्रतिमाओं की स्थापना शायद ही कर पाए। इसका मुख्य कारण पेंडेमिक के बीच पड़ रही दुर्गापूजा की नवरात्रि के दो दिन पूर्व प्रशासन द्वारा मूर्ति स्थापना की गाइडलाइन जारी करना बताया जा रहा हैं ।

मनमाने दाम पर बेंच रहे मूर्तियां

जीवनलाल ने कहा कि अनुमति मिलने मे इतनी देरी हो गई है, कि अब किसी भी साइज की मूर्तियां देना असंभव है। मसौली में भी दुर्गा प्रतिमाओं का आर्डर फुल होने के कारण हम गोण्डा के लोगों के लिये मूर्तियों का आर्डर नहीं ले सकते। इसी बीच लखनऊ के लकड़मंडी इलाके मे खिलौने बनाने वाले कारीगर मां दुर्गा की एक -एक फुट तक की मूर्तियाों को मौके का फायदा उठाकर चार से पांच हजार रुपये तक में बेंच रहे हैं।

अनुमति देरी से मिलने पर मूर्तियां खरीदने में हो रही खासा दिक्कत

बाबा सूरदास मंदिर दुर्गापूजा सेवा समिति के अध्यक्ष दिनेश कश्यप ने बताया कि प्रतिमा स्थापना की अनुमति देरी से मिलने से मूर्तियां खरीदने में भक्तों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। ज्यादातर भक्तों को लखनऊ कानपुर समेत कई अन्य जिलों में जाकर निर्धारित मूल्य से अधिक मनमाने मूल्यों तक मूर्तियां लेनी पड़ रही हैं ।

जीवनलाल ने बताया कि प्रशासन की बेरुखी के कारण उन दोनो के अतिरिक्त श्री नूरामल मंदिर परिसर में बंगाल प्रांत से प्रतिवर्ष आकर मूर्तियां बनाने वाले विख्यात मूर्तिकार हारूपाल बंगाली भी इस बार असंतुष्ट होकर बंगाल चले गये।

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