भारत के लिए अच्छी खबर! विपक्ष के दावों के विपरीत, BSF के अधिकार क्षेत्र का विस्तार

नई दिल्ली: भारत मे आज के दौर में हालात बेहद खराब नजर आ रहे है। सोचिए ज़रा जिस देश पर चीन या पाकिस्तान से हमला किया जा रहा है और युद्ध के लिए सीमा पर पहुंचने से पहले सेना को उस राज्य की सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है, जहां से उसे गुजरना होता है। क्या होगा यदि राज्य अनुमति देने से इंकार कर देता है?

आज भारत में ऐसी ही स्थिति पैदा करने की कोशिश की जा रही है। मोदी सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को एक आदेश के माध्यम से भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमाओं के साथ अंतर्राष्ट्रीय सीमा (आईबी) से भारतीय क्षेत्र के अंदर 50 किमी के क्षेत्र में तलाशी लेने, संदिग्धों को गिरफ्तार करने और जब्त करने का अधिकार दिया है।

हैरानी की बात यह है कि पंजाब और पश्चिम बंगाल की राज्य सरकारों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है और अब बीएसएफ को लेकर राजनीति शुरू हो गई है।

ज्यादातर देशों में राजनीति कितनी भी हो जाए, सुरक्षा के मामले हमेशा उससे ऊपर रखे जाते हैं। लेकिन हमारे देश में इसके ठीक उलट हो रहा है। क्या होगा अगर एक सीमावर्ती राज्य में सरकार सत्ता में आती है जो चुनावी लाभ के लिए आतंकवादियों का समर्थन करना शुरू कर देती है? या फिर अल्पसंख्यक वोट पाने के लिए पाकिस्तान जैसे देशों से दोस्ती करना शुरू कर देता है और सीमाओं पर सुरक्षा से समझौता कर लेता है?

सीधे शब्दों में कहें तो बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। लेकिन हमारे देश का एक खास वर्ग और दल आतंकवादियों के प्रति सहानुभूति रखते हुए इस मुद्दे पर भी राजनीति कर रहे हैं।

केंद्र सरकार समय-समय पर सीमावर्ती राज्यों में बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का फैसला करती है। और इस बार इस अधिकार क्षेत्र को तीन राज्यों – पंजाब, असम और पश्चिम बंगाल तक बढ़ा दिया गया है।

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