खुशखबरी: अब बीएड डिग्रीधारक भी बन सकेंगे प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक, ये होंगे मानक

0

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पिछले कई सालों से सरकार और क्षिक्षकों या क्षिक्षक बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों में रस्साकशी चल रही थी. लेकिन इस बार जो खबर सामने आई है, उससे बीएड अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई है. दरअसल, अब बीएड उत्तीर्ण छात्र भी प्राइमरी स्कूल के शिक्षक बन सकेंगे. राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने प्राथमिक स्कूलों में अध्यापक बनना और आसान कर दिया है। परिषद ने प्राइमरी स्कूलों में अध्यापक बनने की योग्यता में संशोधन करते हुए बीएड को भी शामिल कर लिया है। इसके लिए छात्रों के स्नातक में 50 फीसदी अंक होने चाहिए. नियुक्ति के बाद ऐसे शिक्षकों को दो वर्ष के अन्दर छह महीने का ब्रिज कोर्स भी पास करना होगा.

डिग्री धारकों में खुशी का माहौल

इस खबर के साथ ही बीएड डिग्रीधारकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। उत्तर प्रदेश में बीएड की दो लाख सीटे हैं। एनसीटीई द्वारा प्राइमरी स्कूलों में भर्ती के लिए दो साल के डिप्लोमा पाठ्यक्रम की योग्यता देने से बीएड डिग्री धारको में मायूसी थी। हालांकि इस खबर के बाद एक बार फिर बीएड डिग्री धारकों में खुशी का माहौल है.

डिग्री धारकों को इन मानकों को करना होगा पूरा

एनसीटीई ने भले ही बीएड डिग्री धारको को प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक बनने का सुनहरा अवसर दिया  है. लेकिन इसके लिए उसने कुछ मानक रखें है जिसे डिग्री धारकों को पूरा करना होगा. प्राइमरी टीचर बनने के लिए इन्हें स्नातक में पचास प्रतिशत अंकों के साथ छह महीने का ब्रिज कोर्स पास होना आवश्यक है। साथ ही प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए साथ-साथ टीईटी पास होना भी जरूरी है। 2010 में अधिसूचना जारी की गई थी जिसमें बीएड डिग्री धारक सिर्फ उच्च प्राथमिक स्कूलों में ही आवेदन करने तक सीमित थे। ये खबर बीएड अभ्यार्थियों के लिए किसी तोहफे से कम नही है।

loading...
शेयर करें