खुशखबरी: 25 रुपये किलो मिल सकती है प्याज, मोदी सरकार करने जा रही है ये काम

नई दिल्ली: मोदी सरकार तुर्की और मिस्र से आयात किए हुए 34000 टन प्याज को 25 रुपये किलो बेचने वाली है। यह वह प्याज है जो राज्य सरकारें खरीद नहीं रही हैं। इसके मुताबिक प्याज के लिए कोई खरीदार नहीं होने के कारण, सरकार आयातित प्याज 25 रुपये प्रति किलोग्राम पर बेचने पर विचार कर रही है,जो भाड़ा सहित आधी लागत से भी कम है। हालांकि पहले इसे 55 रुपये किलो बेचने की सरकार की योजना थी।दरअसल सरकार को यह कदम इस लिए उठाने पड़ रहे हैं कि प्याज खराब न हो। दरअसल प्याज एक खराब होने वाली सब्जी है। विशेष रूप से आयातित प्याज को नियंत्रित वातावरण के बाहर रखने पर वह जल्दी खराब हो जाता है। इसलिए, सरकार कई विकल्पों की खोज कर रही है, जिसमें घरेलू बाजार में छूट पर बेचना और पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और मालदीव को निर्यात करना भी इन विकल्पों में शामिल है।

नासिक के प्याज से चार गुना बड़ा है तुर्की का प्याज

इस आयातित प्याज के स्वाद में कमी को देखते हुए कुछ राज्य भारी छूट चाहते हैं वहीं बांग्लादेश इन प्याज को खरीदने के लिए छूट चाहता है। जहां तक तुर्की की प्याज की बात करें तो वह नासिक के प्याज की तुलना में चार गुना बड़ा है और इसमें तीखापन भी कम है। एक सूत्र ने कहा, “आयातित प्याज का स्टॉक जमा हो रहा है। हमारे पास पहले से ही 16 जनवरी तक 22,000 टन का स्टॉक मौजूद है। 25 जनवरी तक 8,000-9,000 टन प्याज इसमें और जुड़ जाएगा। वहीं इस महीने के अंत तक 5,000-6,000 टन प्याज के उत्पादन की उम्मीद है।”

पिछले 10 कारोबारी दिनों में इतना सस्ता हुआ सोना

सरकार अब तक केवल 2,000 टन आयातित प्याज को ही बेच पाई है। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (नेफेड) और आंध्र प्रदेश को 900 टन, उत्तर प्रदेश को 220 टन, तेलंगाना को 120) टन, पश्चिम बंगाल को 125 टन और उत्तराखंड 265 टन प्याज केंद्र सरकार बेच चुकी है।

अभी इतना है प्याज का भाव

वैसे प्याज की औसत कीमतें अभी भी दिल्ली में 78 रुपये प्रति किलोग्राम और मुंबई में 80 रुपये से अधिक है, लेकिन पिछले महीने आयात और ताजा कटाई के बाद वे लगभग कम हो गए हैं। कुछ खुदरा बाजारों में प्याज 50 रुपये बिक रहा है।  बता दें प्याज की खेती महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में होती है। यहां बाढ़ से आपूर्ति को झटका लगा और इससे प्याज की कीमतों में तेजी आई। पिछले साल जनवरी और मई के बीच प्याज का उत्पादन करने वाले किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा थ। एशिया के सबसे बड़े प्याज बाजार महाराष्ट्र के  लासल गांव में औसतन 5-6 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया, जो लागत के मुकाबले 3 से 4 रुपये कम था।

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