खुशखबरी : उत्तर प्रदेश में अब नहीं होगा मजदूरों का शोषण

लखनऊ। आम-तौर पर सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारी विभाग में उनके समान्तर काम करने वाले ठेका कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं।

जबकि सरकारी विभागों में ठेकेदारी प्रथा के तहत काम करने वाले लोगों व सरकारी कर्मचारियों के बीच सही माने में अन्तर केवल आर्थिक स्तर का होता है, बाकी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच काम का कोई अन्तर नहीं होता, अगर मानवीय द्रष्टि से देखा जाए तो ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की कार्य निष्ठा पर संदेह करने की जगह विभागों में इनका सहयोग होना चाहिए, जो कि नहीं हो पा रहा है।

इसका लाभ उठाते हुए ठेकेदारी फर्मो द्वारा इन मजदूरों का श्रम कानून के विपरीत जा कर शोषण तक किया जाता है।

प्रदेश सरकार के वाणिज्य कर विभाग में मैनपावर सप्लाई करने वाली फर्म किंग सिक्योरिटी ने भी कई साल तक ऐसा ही किया। विभाग के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि विभाग के सरकारी कर्मचारियों का संगठन इसके विरोध में उतर आया और न केवल ठेकेदारी फर्म का टेन्डर नहीं हो पाया बल्की विभाग की कमिश्नर अमृता सोनी ने विभाग में केवल सरकारी संस्था से ही ठेके पर काम करने के लिए कर्मचारियों को लेने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

इस नयी शुरूआत से इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा निर्धारित वेतन, पीएफ की कटौती व बीमा अस्पतालों में चिकित्सा की सुविधा भी मिल सकेगी।विभाग के प्रदेश भर के कार्यालयों में करीब 630 कर्मचारी ठेके पर काम करते हैं, कई सालों से इसका ठेका किंग सिक्योरटी कम्पनी के पास था, इस कम्पनी द्वारा ठेका कर्मचारियों को निर्धारित वेतन से भी कम वेतन दिया जा रहा था। पिछले वर्ष मार्च माह में जब इस कम्पनी का ठेका समाप्त हुआ तो कर्मचारियों को तीन माह का वेतन ही नहीं मिला।

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