भारत की महान लेखिका महाश्वेता देवी को गूगल ने डूडल के जरिए किया सलाम

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नई दिल्ली। अपनी सुंदर रचनाओं के जरिए लोगों के दिलों को छूने वाली मशहूर लेखिका महाश्वेता देवी को सर्च इंजन गूगल ने आज उनकी 92 जयंती पर याद किया है। गूगल ने महाश्वेता देवी को अपने डूडल के जरिए श्रद्धांजलि दी। महाश्वेता देवी का जन्म 1926 में ढाका में हुआ। उनके पिता मनीष घटक जाने माने कवि और उपन्यासकार थे। वे कल्लोल आंदोलन से भी जुड़े हुए थे। वे फिल्ममेकर रित्विक घट के भाई थे।

महाश्वेता देवी को पद्मश्री और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया

महाश्वेता देवी बंगाली लेखिका थीं, जिन्हें कई साहित्य पुरस्कारों जैसे साहित्य अकादमी अवॉर्ड (बंगाली), ज्ञानपीठ अवॉर्ड, रमन मैगससे अवॉर्ड से नवाजा गया। उन्हें पद्मश्री और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया। 28 जुलाई 2016 को कोलकाता में उनका निधन हो गया। उनकी प्रसिद्ध साहित्यिक रचनाओं में ‘हजार चुराशिर मां’, ‘रुदाली’ और ‘अरण्येर अधिकार’ शामिल हैं। महाश्वेता देवी ने 100 से ज्यादा उपन्यास लिखे। उनका पहला उपन्यास ‘झांसीर रानी’ था। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित यह उपन्यास 1956 में प्रकाशित हुआ था।

रमन मैगसेसे अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया

पत्रकारिता, साहित्य और रचनात्मक संचार कला में योगदान देने के लिए साल 1997 में उन्हें रमन मैगसेसे अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। महाश्वेता देवी को साहित्य में योगदान देने के लिए 2003 में प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘ऑरद्रे देस आर्ट्स एत देस लेटर्स’ से भी सम्मानित किया गया था।

महाश्वेता देवी ने कम उम्र में ही लिखना शुरू कर दिया था। शुरुआत में उन्होंने विभिन्न छोटी-बड़ी साहित्यिक पत्रिकाओं के लिए लघु कथाएं लिखीं। 1939 में शांतिनिकेतन से वापस कलकत्ता लौटने के बाद उनका दाखिला बेलतला बालिका विद्यालय में आठवीं कक्षा में हुआ। स्कूल में उनकी एक शिक्षिका थीं अपर्णा सेन, जिनके बड़े भाई ‘रंगमशाल’ निकालते थे।

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