पठानकोट की तरह सेफ नहीं है गोरखपुर एयरबेस

Gorakhpur Airbase

गोरखपुर। महानगर को फोरलेन बाईपास से जोड़ने वाली सड़क के पास बना गोरखपुर एयरबेस भी पठानकोट की तरह सेफ नहीं है। हांलाकि पठानकोट हमले के बाद पुलिस प्रशासन ने सक्रियता दिखाने की कोशिश की है। इस कोशिश में स्थायित्व कितने दिनों तक रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। ताजा आतंकी हमले के बाद आईजी जोन गोरखपुर ने पुलिस अधिकारियों की बैठक कर एयरपोर्ट और गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश भी दे दिया।

बंदोबस्त ना के बराबर
गोरखपुर में एयरफोर्स एरिया की एक खास पहचान है। चीन से होने वाले किसी भी युद्ध में इस एयरपोर्ट का सामरिक महत्व है। यह इलाका फोरलेन को शहर से कनेक्ट करने वाले रोड पर है और पूरी तरह से सिविल क्षेत्र में बसा है। इस सड़क पर पुलिस का जो बंदोबस्त होना चाहिए वह है नहीं। कहने के लिए 25 पुलिसकर्मियों की एक स्पेशल टीम बनी है जिसकी जिम्मेदारी है कि वह इस सैन्य क्षेत्र में अपनी हनक का एहसास कराये। लेकिन इस टीम के दर्शन भी पहली बार तब हुए जबकि पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमला हो गया।

बिना रोक पहुंच सकते हैं आतंकी
एयरफोर्स एरिया में रेलवे स्टेशन होने के अलावा कुशीनगर और बिहार से बसों का आना-जाना होता है। यातायात के इन साधनों के दैनिक जांच का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। ऐसे में आतंकी एयरफोर्स एरिया में दाखिल हो जाएं तो हैरत की बात नहीं। एयरफोर्स के कमांडो जब तक हालात पर काबू पाएंगे तब तक आतंकी कुछ न कुछ जरूर नुकसान कर चुके हैं।

पुलिस चौकी पर सिर्फ वसूली
कहने के लिए एयरफोर्स इलाके में एक पुलिस चौकी भी है लेकिन यहां कभी भी वाहनों की जांच नहीं की जाती। रात में चौकी के सिपाही सिर्फ वसूली में मशगूल रहते हैं। ऐसे में कोई अराजक तत्व या सामग्री इस चौकी से निकलकर एयरफोर्स गेट तक चले जाएं तो कोई पूछने वाला नहीं। स्थिति यह है कि चौकी के सामने से 60 किमी प्रति घंटे की स्पीड में वाहन फर्राटे भरते हैं, जबकि नियम यह है कि इस इलाके में 30 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की स्पीड में गाड़ी नहीं चलाई जा सकती।

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