इकनॉमिक ग्रोथ के लिए GDP का 3.75% फिस्कल डेफिसिट तय कर सकती है सरकार

नई दिल्ली: 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार इकनॉमिक ग्रोथ में तेजी लाने के लिए अपना खर्चा बढ़ा सकती है। इसके लिए सरकार बजट में अगले वित्त वर्ष यानी 2020-21 के लिए आमदनी और खर्च के बीच के अंतर यानी फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य GDP के परिपेक्ष्य में 3.75 पर्सेंट तय सकती है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 3.3 पर्सेंट रखा है। सूत्रों के अनुसार, इस बार के बजट में सरकार पर जहां आम आदमी को कुछ राहत देने का दबाव है वहीं दूसरी तरफ उस पर इकनॉमिक ग्रोथ को फिर से पटरी पर लाने का दबाव है।

इसके लिए जरूरी है कि जिन सेक्टरों पर स्लोडाउन का साया ज्यादा छाया हुआ है, उनको राहत पैकेज दिया जाए। उनको टैक्स में कुछ छूट दी जाए। इसके लिए सरकार को पैसा खर्च करना पड़ेगा। ऐसा होने पर खर्च ज्यादा बढ़ सकता है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार इस बारे में वित्त मंत्रालय के साथ पीएमओ महामंथन हुआ। आखिरकार यह फैसला किया गया कि इस वक्त इकॉनमी ग्रोथ को प्रमुखता दी जाए। ऐसे में अगर राजकोषीय घाटा कुछ बढ़ता है तो उस पर समझौता कर लिया जाए। इसके बाद यह भी तय किया गया है कि राजकोषीय घाटे को चार फीसदी के भीतर ही रखा जाए। इसे जीडीपी के परिपेक्ष्य में 3.70 से 3.75 फीसदी के दायरे में ही रखा जाए। इससे सरकार पर उधारी लेने का जो भार बढ़ेगा, उसे विनिवेश राशि में बढ़ोत्तरी या जीएसटी कलेक्शन को बढ़ाकर पूरा किया जाए।

इस बजट में सरकार जल मिशन को बढ़ावा देने के लिए करीब तीन लाख करोड़ रुपये के फंड के आवंटन का ऐलान कर सकती है। इस बारे में उपभोक्ता मंत्रालय ने जो ड्राफ्ट तैयार किया था, उसपर सहमति बन गई है।

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