‘नई कृषि नीति को वापस ले और एमएसपी की गारंटी दे सरकार’

नई कृषि नीति को सरकार वापस ले और एमएसपी की गारंटी दे की सरकारी या प्राईवेट तय रेट कृषि उत्पादक कम पर खरीदारी नहीं करेगा।

प्रयागराज: समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद उज्जवल रमण सिंह ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को किसानों की जायज मांग को तत्काल स्वीकार कर नई कृषि नीति को रद्द करना चाहिए।

‘किसानों के सब्र का इम्तिहान ले रही मोदी सरकार’

पूर्व संसद ने कहा कि, “ठंड में अपना काम धन्धा, घरद्वार छोड़ महिलाएं और वृद्ध किसान 11 दिन से सड़क पर पड़े हैं। केंद्र सरकार वार्ता के नाम से समय व्यतीत कर रही हैं या किसानों के सब्र का इम्तिहान ले रही हैं। मोदी सरकार ने नोट बंदी, जीएसटी, लाकडाऊन जैसे निर्णय तानाशाही तरीक़े से एक झटके से लिया तो 11 दिन से धरना दे रहे किसानों से वार्ता का नाटक क्यों किया जा रहा हैं। पांच बार किसान प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के मंत्री स्तर की वार्ता फेल हो गई हैं। यह सिर्फ टाइम व्यतीत करने और किसानों को परेशान करने जैसा है।”

‘नई कृषि नीति को वापस ले सरकार और एमएसपी की गारंटी दे’

सिंह ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि, “मोदी सरकार किसानों की आय दुगना करने का जुमला दे रही हैं। पिछले पांच साल से पेट्रोल, डीजल, खाद-पानी, बिजली के दरों में दोगने का अन्तर पहले ही आ गया है। बाकी आवारा पशु किसानों की मेहनत को चर रहे हैं। उन्होने कहा हकीकत में आय दोगुनी को आकंड़ों की बाजीगरी मे सरकार इसको सिद्ध कर देगी। नई कृषि नीति से कांट्रेक्ट फार्मिंग को बढ़ावा मिलेगा। किसान खेतीहर मजदूर होकर रह जायेगा, जमाखोरी बढ़ेगी, जिससे जनता को महंगी चीजें मिलेंगी। इस लिए नई कृषि नीति को सरकार वापस ले और एमएसपी की गारंटी दे की सरकारी या प्राईवेट तय रेट कृषि उत्पादक कम पर खरीदारी नहीं करेगा।

किसान आंदोलन के आगे सरकार को पड़ेगा झुकना

किसान आंदोलन के आगे सरकार को झुकना ही पड़ेगा । यह दांव उलटा पड़ गया हैं इसलिए वार्ता दर वार्ता का दौर चलाया जा रहा है कि समय निकले और इस विरोध को भी अवसर के तौर पर लेने के लिए एक दिन अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी टीवी पर किसानों के हिमायती बनते हुए नई संशोधित बिल पेश करेंगे।

उन्होने कहा कि जिस प्रकार चाईना मामले में गलवान घाटी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जाने का प्रोग्राम फाइनल होकर उनकी जगह पीएम मोदी खुद गये। क्योंकि पूरे विश्व की निगाह और मीडिया का फोकस उस संकट काल पर थीं। इसी तरह किसानों और सरकार के बीच पहली वार्ता में भी राजनाथ सिंह के नेतृत्व में होनी थी, लेकिन अचानक वो नहीं गये इससें सिद्ध होता हैं कि एक और औपचारिक वार्ता के बाद अब जल्दी ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसानों को संबोधित करेंगे।

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