Greater Noida Lease Back Issue: SIT रिपोर्ट रद्द करने की मांग को लेकर किसानों ने शुरू किया धरना

(Greater Noida Lease Back Issue) को लेकर सैकड़ों किसानों ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन के बाद धरना शुरू कर दिया।

ग्रेटर नोएडा, जनपद गौतम बुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा इलाके में लीजबैक मामले (Greater Noida Lease Back Issue) को लेकर सैकड़ों किसानों ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन के बाद धरना शुरू कर दिया।
किसान लीज बैंक घोटाले (Greater Noida Lease Back Issue) को लेकर चल रही विशेष जांच दल (SIT) की जांच रिपोर्ट को रद्द किए जाने की मांग कर रहे थे। किसानों ने इस आंदोलन को धार देने के लिए 50 गांवो के लोगो को साथ लेकर एक किसान सेवा संघर्ष समिति का गठन किया है।

किसान सेवा संघर्ष समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी (Manveer Bhati) ने धरने को सम्बोधित करते हुए कहा,“एसआईटी की रिपोर्ट के बारे में समाचार पढ़ने के बाद हमारा एक प्रतिनिधिमंडल ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी केके गुप्त से मिला। उनसे एसआईटी की रिपोर्ट मांगी गई। उन्होंने जवाब दिया कि रिपोर्ट उनके पास नहीं आई है। इसके बाद हम लोगों ने शासन से जानकारी हासिल की। वहां से पता चला कि एसआईटी की रिपोर्ट मिल चुकी है और विकास प्राधिकरण को भेज दी है।”

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भाटी ने एसीईओ के के गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा,“एसीईओ ने एसआईटी (SIT) के सामने सही और पूरे तथ्य नहीं रखे हैं। जानबूझकर किसानों के खिलाफ रिपोर्ट बनवाई गई है। बाहरी पूंजीपति व्यक्तियों की आबादियों को हरी झंडी दे दी गई है। ग्रेटर नोएडा के मूल किसानों की आबादी के साथ उनको मिल चुके छह फीसदी प्लॉट को भी खत्म करने की सिफारिश की गई है।”

किसान नेता मनवीर भाटी SIT रिपोर्ट रद्द करने की मांग पर अड़े

भाटी ने कहा,“हम एसआईटी की जांच रिपोर्ट और सिफारिशों का हर जगह विरोध करेंगे। किसानों के साथ धोखाधड़ी करने और हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। किसानों ने समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सरकारों के 10 वर्ष के कार्यकाल में लंबे संघर्ष के बाद अपने परिवारों की सामाजिक सुरक्षा हासिल की थी। जिसे विकास प्राधिकरण ने तबाह कर दिया है। इसके खिलाफ किसान एकजुट हैं। प्राधिकरण की तानाशाही को स्वीकार नहीं। हम आज यहां विकास प्राधिकरण के बाहर आकर बैठ गए हैं। हमारी बस एक ही मांग है, एसआईटी की रिपोर्ट को रद्द किया जाए। जब तक प्राधिकरण और शासन यह रिपोर्ट ख़ारिज नहीं करेंगे, हमारा धरना जारी रहेगा।”

जाने क्या है मामला ?

ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के बिसरख गांव में बहुजन समाज पार्टी और फिर समाजवादी पार्टी की सरकारों के कार्यकाल में लीजबैक घोटाले (Greater Noida Lease Back Issue) को लेकर सैकड़ों किसानों ने सोमवार को ग्रेटर नोएडा मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन के बाद धरना शुरू कर दिया। का आरोप लगाते हुए सरकार से शिकायत की गई थी। इस मामले पर सरकार ने एक विशेष जांच दल एसआईटी का गठन यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ.अरुण वीर सिंह की अध्यक्षता में किया था। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि लीजबैक के नाम पर व्यापक रूप से अनियमितताएं और धांधली की गई है। बड़ी बात यह है कि जिन बाहरी लोगों का हवाला देते हुए यह शिकायत की गई थी, उन्हें एसआईटी ने क्लीन चिट दे दी है। एसआईटी ने पाया है कि जिन किसानों ने आबादी छुड़वा ली है, उन्हें गलत ढंग से छह फीसदी के रेजिडेंशियल प्लॉट दिए गए हैं। एसआईटी ने सिफारिश की है कि आबादी छुड़वाने वाले किसानों को छह फीसदी भूखंड और भविष्य में प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं में आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। यही इस जांच रिपोर्ट की सबसे बड़ी सिफारिश है।

कुछ लोगों ने उत्तर प्रदेश शासन (Government of Uttar Pradesh) से शिकायत की थी कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बिसरख गांव में मुंबई, दिल्ली और कुछ अन्य शहरों के निवासियों ने वर्ष 2000 के आसपास जमीन खरीदी थीं। जब वर्ष 2008 में ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण (Noida Development Authority) ने इस इलाके में भूमि अधिग्रहण किया तो इन बाहरी लोगों को 20 हजार से 50 हजार वर्ग मीटर जमीन आबादी के नाम पर छोड़ दी गई। यह घोटाला तत्कालीन सरकार द्वारा घोषित आबादी नियमावली की आड़ में अंजाम दिया गया है।

इस पर सरकार ने जांच करने के लिए यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ.अरुण वीर सिंह की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल का गठन कर दिया। इस एसआईटी में ग्रेटर नोएडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी केके गुप्त, नोएडा के विशेष कार्याधिकारी संतोष कुमार उपाध्याय, यमुना प्राधिकरण के महाप्रबंधक केके सिंह, नोएडा के चीफ आर्किटेक्ट प्लानर इस्तियाक अहमद, गौतमबुद्ध नगर के अपर जिलाधिकारी (भूमि अध्यापति) बलराम सिंह और नोएडा प्राधिकरण के चीफ एडवाइजर अंगद प्रसाद शामिल थे।

शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक एसआईटी ने 21 फरवरी 2019 से 30 सितंबर 2020 तक आठ बार बैठक की। ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी केके गुप्त ने दो तरह के मामले जांच के लिए एसआईटी के सामने पेश किए। पहली श्रेणी में ऐसे मामलों को रखा गया, जिनमें 24 अप्रैल 2010 को गठित आबादी व्यवस्थापन समिति ने फैसले लिए थे। दूसरी श्रेणी में ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (Noida Industrial Development Authority) ग्रामीण आबादी स्थल (प्रबंधन एवं विनियमितीकरण) नियमावली-2011 के तहत लिए गए निर्णय हैं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि 24 अप्रैल 2010 को लागू नियमावली के अधीन कुल 33 गांव के प्रकरण हैं।

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