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इन फूलों को पीसकर चेहरे (Face) में लगाने से आती है चमक, दूर होता है बुढ़ापा

पलाश का फूल बहुत ही आकर्षक होता हैं। इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे ‘जंगल की आग’ भी कहा जाता है, इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने में भी किया जाता है

लखनऊ: पलाश (Palash) एक वृक्ष है जिसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे ‘जंगल की आग’ भी कहा जाता है। पलाश का फूल उत्तर प्रदेश का राज्य पुष्प है और इसको ‘भारतीय डाकतार विभाग’ द्वारा डाक टिकट पर प्रकाशित कर सम्मानित किया जा चुका है।

पलास के पेड़ भारत के सभी प्रदेशों और सभी स्थानों में पाया जाता है। पलास का पेड़ मैदानों और जंगलों में ही नहीं बल्कि 4000 फुट ऊंची पहाड़ियों की चोटियों तक पर किसी न किसी रूप में अवश्य मिलता है। यह तीन रूपों में पाया जाता है- वृक्ष रूप में, क्षुप रूप में और लता रूप में। बगीचों में यह वृक्ष रूप में और जंगलों और पहाड़ों में अधिकतर क्षुप रूप में पाया जाता है। लता रूप में यह कम मिलता है।

इसका का पेड़ ऊंचा नहीं होता, मझोले आकार का होता है। क्षुप झाड़ियों के रूप में अर्थात् एक स्थान पर पास पास बहुत से उगते हैं। पत्ते इसके गोल और बीच में कुछ नुकीले होते हैं जिनका रंग पीठ की ओर सफेद और सामने की ओर हरा होता है। पत्ते सीकों में निकलते हैं और एक में तीन तीन होते हैं। इसकी छाल मोटी और रेशेदार होती है। लकड़ी बड़ी टेढ़ी मेढ़ी होती है। इसका फूल छोटा, अर्धचंद्राकार और गहरा लाल होता है। फूल को प्रायः टेसू कहते हैं और उसके गहरे लाल होने के कारण अन्य गहरी लाल वस्तुओं को ‘लाल टेसू’ (Red Tesu) कह देते हैं। फूल फागुन के अंत और चैत के आरंभ में लगते हैं। उस समय पत्ते तो सबके सब झड़ जाते हैं और पेड़ फूलों से लद जाता है जो देखने में बहुत ही  सुंदर और आकर्षित लगता है।

होली के रंग

  • प्राचीन काल से ही होली के रंग इसके फूलो से तैयार किये जाते रहे है। होली के लिए रंग बनाने के अलावा इसके फूलों को पीसकर चेहरे में लगाने से चमक बढ़ती है।
  • पलाश की फलियां कृमिनाशक का काम तो करती ही है इसके उपयोग से बुढ़ापा भी दूर रहता है।
  • पलाश फूल (Palash Flowers) से स्नान करने से ताजगी महसूस होती है। पलाश फूल के पानी से स्नान करने से लू नहीं लगती तथा गर्मी का अहसास नहीं होता।
  • काम शक्तिवर्धक और शीघ्रपतन की समस्या को दूर करता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इससे प्राप्त लकड़ी से दण्ड बनाकर द्विजों का यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता है।
  • आजकल पलाश का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन बनाने में भी किया जा रहा है।
  • पलाश से प्राप्त कमरकस आयुर्वेदिक औषधि (Ayurvedic Medicine) है। पलाश की पत्तियों से पत्रावली भी बनाई जाती है।

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