नहीं रहे ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह, सांसों की डोर टूटते ही गम में डूबा ग्रुप कैप्टन का गांव

सांसों की डोर थमी

तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकाप्टर दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल ग्रुप कैप्टन वरुण सिंह गुरुवार को बंगलुरु के आर्मी अस्पताल में आखिरी सांस ली. पैतृक गांव रुद्रपुर तहसील क्षेत्र के कन्हौली गांव में गुरुवार की दोपहर में करीब एक बजे फोन पर आई सूचना ने सभी को दहला दिया. वरुण के पिता कर्नल केपी सिंह और चाचा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पूर्व विधायक अखिलेश प्रताप सिंह व परिवार के अन्य सदस्य बेंगलुरु में हैं. आठ दिसंबर को तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकाप्टर दुर्घटना में सीडीएस जनरल बिपिन रावत सहित 13 लोगों की मृत्यु हो गई थी. जिसमें ग्रुप कैप्टन वरुण घायल थे. जिनका उपचार आर्मी के अस्पताल में हो रहा था. वरुण के एक पुत्र व एक पुत्री हैं. पत्नी गीतांजलि व माता उमा सिंह,चाचा दिनेश प्रताप सिंह, उमेश प्रताप सिंह, रमेश प्रताप सिंह व अखिलेश प्रताप सिंह हैं.

पांच महीने पहले आए थे गांव

वरुण अपने पैतृक गांव कन्हौली पांच माह पहले लखनऊ में आयोजित एक शादी समारोह के बाद अपने पैतृक गांव भी आए. गांव में आसपास के लोगों से मुलाकात भी की थी. मिलनसार स्वभाव के वरुण ने सबका कुशलक्षेम पूछा था. सभी लोग उनकी बातों को याद कर भावुक हो रहे हैं.

राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र से किया था सम्मानित

वरुण को अदम्य साहस के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 15 अगस्त को शौर्य चक्र से सम्मानित किया था. वह 12 अक्टूबर 2020 को लाइट कांबेट एयरक्राफ्ट के साथ उड़ान पर थे। तभी फ्लाइंग कंट्रोल सिस्टम में खराबी आ गई. उन्होंने सूझबूझ से 10 हजार फीट की ऊंचाई से विमान की लैंडिंग कराने में सफलता हासिल की थी.

 

यह भी पढ़ें- पत्रकारों पर बिफरे मोदी के मंत्री अजय मिश्रा टेनी, जानिए क्या कुछ कह डाला

(Puridunia हिन्दी, अंग्रेज़ी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब  पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं)…

Related Articles