GST फर्जीवाड़े का हुआ पर्दाफाश, बिना माल सप्लाई किए फर्जी तरीके से लिया ITC

नई दिल्ली: जीएसटी चोरी के एक बड़े मामले का भंडाफोड़ करते हुए केंद्रीय जीएसटी अधिकारियों ने दिल्ली में 7896 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग पकड़ी है। टैक्स चोरों ने करीब दो दर्जन फर्जी कंपनियां बनाकर बिना वास्तविक व्यापार के ही फर्जी बिलों के सहारे करीब 1709 करोड़ रुपये का इनपुट टैक्स क्रेडिट लेने की कोशिश की थी। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और विभाग ट्रेडिंग नेटवर्क की और परतें भी खंगाल रहा है।

सीजीएसटी के वेस्ट दिल्ली कमिश्नरेट की टैक्स चोरी निरोधक शाखा ने डेटा एनालिटिक्स से मिले सुराग के आधार पर पिछले दिनों इस नेटवर्क की छानबीन शुरू की थी, जिसमें एक-एक कर बोगस ट्रेडिंग के कई तार जुड़ते चले गए। केंद्रीय जीएसटी की ओर से मंगलवार को खुलासा किया गया गया कि इस नेटवर्क ने कुल 23 शेल कंपनियां बनाकर ग्राहकों को फर्जी बिल जारी किए, जिन्होंने बिना कोई माल रिसीव किए अपनी जीएसटी लायबिलिटी के अगेंस्ट इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम किया और सरकारी खजाने को चपत लगाई।

कमिश्नरेट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपियों ने सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 132(1) (B) और (C) के तहत संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध किए हैं, इसलिए सेक्शन 69(A) के तहत दो लोगों की गिरफ्तारी की गई है। पटियाला हाउस कोर्ट ने इन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

फाइलिंग की डेट खत्म होने के साथ ही केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर फर्मों की ऑडिटिंग भी शुरू हो गई है, ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्स चोरी के और मामले सामने आएंगे। जीएसटी लागू होने के बाद से राजस्व में वह तेजी दर्ज नहीं की गई है, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इसके पीछे टैक्स चोरी को भी एक वजह बताया जा रहा है।

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