जीएसटी कॉउंसल फ्यूल को indirect tax व्यवस्था के तहत लाने पर करेगी विचार

नई दिल्ली : माल और सेवा कर (जीएसटी) परिषद जो अगले सप्ताह लखनऊ में बैठक करेगी, एक या एक से अधिक पेट्रोलियम उत्पादों-पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और विमानन टरबाइन ईंधन को जीएसटी के indirect tax दायरे में लाने पर चर्चा कर सकती है।

indirect tax के फैसले का क्या होगा अवाम पर असर

इस मामले को 17 सितंबर को चर्चा और निर्णय के लिए परिषद के सामने लाया जाएगा। पेट्रोलियम उत्पादों पर केंद्रीय और राज्य करों ने 2019-20 में ₹5.55 लाख करोड़ से अधिक का योगदान दिया, और डीजल और पेट्रोल उस क्रम में दो सबसे बड़े राजस्व अर्जित करने वाले कमोडिटी हैं। इस कड़ी में जानकारों के मुताबिक एक समान जीएसटी से पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य के शुल्क में भारी कमी आएगी और ऑटोमोबाइल ईंधन की उपभोक्ता कीमतों में भारी कमी आएगी।

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फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल ₹101.19 प्रति लीटर और डीजल ₹88.62 प्रति लीटर बिक रहा है। दिल्ली में, केंद्रीय लेवी पेट्रोल की कीमत का 32% से अधिक है, और राज्य कर (मूल्य वर्धित कर या वैट) 23.07% है। डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क 35% से अधिक है जबकि राज्य कर 14% से अधिक है।

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