Guru Purnima 2021: जानिए क्या है महत्व और शुभ मुहूर्त

आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया और सभी पुराणों की रचना की थी।

लखनऊ: आज यानि 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का त्‍यौहार मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि को पूर्णिमा होती है। लेकिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा को आषाढ़ चौमासी चौदस और गुरु पूर्णिमा (Ashadh Guru Purnima) होती है। इस दिन गुरु की पूजा का विशेष महत्व है। पुराणों के मुताबिक इस दिन भगवान विष्णु का वास जल में होता है जिसकी वजह से पूर्णिमा के दिन नदी में स्नान, दान और भगवान विष्णु और शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है।

क्यों कहते हैं गुरु पूर्णिमा: आषाढ़ पूर्णिमा के दिन ही महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था। उन्होंने मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया और सभी पुराणों की रचना की थी। महर्षि वेदव्यास के योगदान को देखते हुए आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखने के साथ ही भक्त भगवान विष्णु की अराधना करते हैं और प्रभु का स्मरण व कथा पाठ किया जाता है।

हिंदू धर्म में गुरु की महिमा बताते हुए कहा गया है कि गुरु का स्थान भगवान से ऊंचा होता है। हिंदू धर्म में आषाढ़ चौमासी चौदस पूर्णिमा का विशेष स्थान होता है लेकिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा का सर्वोच्च स्थान है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा (Guru Purnima) का पर्व मनाया जाता है। इसी के तहत आज गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।

Guru Purnima पर बन रहें है दो शुभ योग

पंचांग के मुताबित, आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन दो योग – प्रीति योग एवं सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। आज 24 जुलाई को सुबह में 6 बजकर 12 मिनट से प्रीति योग लग गया है जो कि अगले दिन 25 जुलाई को सुबह तड़के 03 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। वहीँ आज 24 जुलाई को दोपहर 12 बजकर 40 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है जो कि अगले दिन 25 जुलाई को प्रात: 05 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। यह दोनों विशेष योग शुभ माने जाते हैं।

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