सोने के आभूषणों पर Hallmarking अनिवार्य, अब धोखा नहीं खाएंगे उपभोक्ता

देश में सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग (Hallmarking) अनिवार्य हो गई है, यानी कि आप किसी भी दुकान से सोना खरीदने जाएंगे तो आपको सिर्फ हॉलमार्क का ही सोना मिलेगा

लखनऊ: देश में मंगलवार 15 जून से सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग (Hallmarking) अनिवार्य हो गई है। यानी कि आप किसी भी दुकान से सोना (Gold) खरीदने जाएंगे तो आपको सिर्फ हॉलमार्क का ही सोना मिलेगा। सबसे खास बात यह है कि सोने पर लिखा होगा कि यह कितने कैरेट का है।

हॉलमार्किंग से आम लोगों को फायदा

BIS के मुताबिक, हॉलमार्किंग से आम लोगों को लाभ होगा। हॉलमार्किंग यह सुनिश्चित करेगा कि ग्राहक सोने के गहने खरीदते समय धोखा न खाएं और और उन्हें आभूषणों पर मार्क शुद्धता के अनुसार ही आभूषणों की प्राप्ति हो।गोल्ड हॉलमार्किंग (Gold Hallmarking) सोने की शुद्धता की जांच का एक सर्टिफिकेट है। आज से सभी ज्वैलर्स को सिर्फ 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट वाले गोल्ड की बिक्री की ही इजाजत है।

ज्वैलर खुश

सोने के आभूषणों पर हॉलमार्किंग अनिवार्य होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के ज्वैलर खुश हैं। एक ज्वैलर ने कहा कि, ये हमारे क्षेत्र में बहुत अच्छा कदम है। हम बहुत बड़ी प्रतिस्पर्धा में थे क्योंकि जो कम शुद्धता का माल बिकता है उससे हमें ग्राहकों को समझाने में परेशानी होती थी।

हॉलमार्किंग का महत्व

आभूषणों में मिलावट रोकने के लिए हॉलमार्किंग की व्यवस्था है। यह व्यवस्था बहुत पुरानी है। अलग -अलग देशों में हॉलमार्किंग की व्यवस्था भी अलग -अलग है। हॉलमार्क के आभूषण अंतर्राष्ट्रीय मानक के होते हैं। प्लैटिनम,सोने, चांदी, हीरा आदि के आभूषणों की गुणवत्ता की पहचान के लिए हॉलमार्क चिन्ह की एक समान व्यावस्था है। इस पर भारत सरकार की गारंटी होती है। हॉलमार्किंग के आभूषण निर्माण लागत अधिक होने के कारण 10 से 15 प्रतिशत मंहगे होते हैं लेकिन शुद्धता की गारंटी होती है। भारत में सोने के आभषणों पर हॉलमार्किंग की व्यवस्था वर्ष 2000 से और चांदी के आभूषणों पर 2005 से लागू है।

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