हथकरघा दिवस: 14 बुनकरों को किया गया सम्मानित, ओडीओपी योजना शुरू

लखनऊः उत्तर प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि देश में लगभग 50 लाख हथकरघा बुनकर है। उत्तर प्रदेश में लगभग 2.58 लाख व्यक्ति हथकरघा बुनाई का कार्य कर रहे हैं। हथकरघा बुनकरों को प्रोत्साहित करने एवं पारंपरिक कला को संरक्षित करने के उद्देश्य से एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इसके तहत कारीगरों को प्रोत्साहन से लेकर कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

सिंह ने कहा यहां आवास विकास परिषद सभागार में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आयोजित बुनकर सम्मान समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बुनकरों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। हथकरघा उत्पादों को निर्यात को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे कारीगरों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।

क्लस्ट विकास योजना

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक कौशल को निखारने और कारीगरों के उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चला रही है। क्लस्ट विकास योजना इनमें से एक है। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक बुनकर क्लस्टर से जुड़कर इस योजना का लाभ लें। क्लस्टर योजना के के तहत राज्य सरकार बुनकरों को प्रशिक्षण, विपणन में सहायता, कच्चा माल की उपलब्धता जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध करायेगी।

क्लस्टर के तहत कार्य करने से खदीददार

उन्होंने कहा कि क्लस्टर के तहत कार्य करने से खदीददार स्वयं उन तक पहुंचेंगे। इसके लिए बुनकरों को पुराने ढर्रें से निकल कर आगे आना होगा। सरकार 24 घण्टे बुनकरों की मद्द के लिए तैयार है। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने कहा कि आज का दिन प्रेरणादायक है। वर्तमान युग में पा्रचीन कला, कौशल और कारीगरी लुप्त होती जा रही है।

हम तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ सकेंगे

हमें अपनी परम्परा, संस्कृति को पुनः वापस लाना होगा, तभी हम तरक्की के मार्ग पर आगे बढ़ सकेंगे। उन्होंने कहा समय बदल रहा है। देश-दुनिया में आज लोग फिर से हाथ सेे बने उत्पादों को महत्व देने लगे हैं। हाथ से बने वस्त्र जहां स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं, वहीं आत्म निर्भर भारत की कल्पना को साकार करने में मदद करेंगे।

कपड़े की सप्लाई

अपर मुख्य सचिव डा0 नवनीत सहगल ने कहा कि आज के दिन का महत्व देश की आजादी से जुड़ा है। अंग्रेजों के शासनकाल में घरेलू अर्थव्यवस्था को समाप्त करने के लिए यहां से कच्चा माल विदेश भेज दिया जाता था और वहां से कपड़े की सप्लाई होती थी।

 

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